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स्वच्छता का मॉडल इंदौर अब जनस्वास्थ्य संकट का सामना, दूषित पेयजल से सैकड़ों प्रभावित

भारत का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर-- जहाँ स्वच्छता एक पहचान रही है, वहीं वर्ष 2026 की शुरुआत में यही शहर एक गंभीर जनस्वास्थ्य आपदा का गवाह बना।

इंदौर : भारत का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर-- जहाँ स्वच्छता एक पहचान रही है,
वहीं वर्ष 2026 की शुरुआत में यही शहर एक गंभीर जनस्वास्थ्य आपदा का गवाह बना। भगीरथपुरा क्षेत्र में लोगों ने सबसे पहले पेयजल की गुणवत्ता में बदलाव महसूस किया पानी से दुर्गंध आने लगी, स्वाद कड़वा हो गया और रंग भी सामान्य नहीं रहा। कुछ ही दिनों में, यही पानी सैकड़ों लोगों की बीमारी की वजह बन गया। दूषित पानी के सेवन के बाद स्थानीय निवासियों में
उल्टी, दस्त, तेज़ बुखार और गंभीर निर्जलीकरण जैसे लक्षण सामने आए। अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई, और हालात जल्द ही नियंत्रण से बाहर हो गए।

दूषित पानी के फैलने के पीछे वजहें

- प्रशासन ने पानी के सैंपल की लैब रिपोर्ट में पाइपलाइन में लीकेज की पुष्टि की है। यही मुख्य वजह बनी दूषित पानी की सप्लाई की।

- भगीरथपुरा के एक हिस्से में पानी की लाइन के ऊपर शौचालय मौजूद है। इससे मलजल सीधे ड्रिंकिंग वाटर लाइन में मिल गया।

क्यों उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बीमारी फैली?

- दूषित पानी में ई. कोली, सैल्मोनेला जैसे रोग-जनकों के कारण पेट में संक्रमण होता है, जिससे डायरिया, उल्टी, डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण होते हैं।

-  कम प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर अधिक असर । बच्चे, बुज़ुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग जल्दी गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं।

बड़ी वजहें :-

- लंबे समय से मेंटेनेंस न होने और पुरानी पाइपों में लीकेज का खतरा बढ़ा हुआ था।

- शौचालय/ड्रेनेज संरचना और पेयजल लाईन का अपर्याप्त विभाजन

-  पानी की नियमित गुणवत्ता जाँच और निगरानी के SOP का अभाव

-  लोगों ने पहले भी पानी के गंदे होने की शिकायत की थी जिसे पर्याप्त तवज्जो नहीं मिली

प्रशासन की कार्रवाई :-

- पाइपलाइन की थरथराहट/लीक की पहचान के बाद मरम्मत कार्य शुरू।

-  लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई।

लीप और जिम्मेदारों पर कार्रवाई ,  कुछ अधिकारियों को निलंबित/बर्खास्त किया गया।

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