अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : चुनाव आयोग के तत्वावधान में राजधानी दिल्ली में बुधवार से लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईआईडीईएम-2026 की शुरुआत हो रही है। इस सम्मेलन में विश्व के 70 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 100 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के पहले दिन चुनाव आयोग की ओर से विश्व के सबसे बड़े चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024 के सफल आयोजन पर आधारित द्विवार्षिक श्रृंखला “इंडिया डिसाइड्स” का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान (आईआईडीईएम) द्वारा आयोजित यह सम्मेलन 21 से 23 जनवरी तक राजधानी के भारत मंडपम में चलेगा। लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में यह भारत द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के अनुसार सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भारत में कार्यरत विदेशी मिशनों के सदस्य तथा चुनाव संबंधी विषयों के अकादमिक और व्यावहारिक विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने सहयोगी चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ 21 जनवरी को उद्घाटन सत्र में प्रतिनिधियों का स्वागत करेंगे।
सम्मेलन के दौरान चुनाव प्रबंधन निकायों (ईएमबी) के सामान्य और पूर्ण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें उद्घाटन सत्र, चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रमुखों का पूर्ण सत्र, कार्य समूहों की बैठकें तथा वैश्विक चुनावी चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय मानकों, नवाचारों और सर्वोत्तम चुनावी प्रक्रियाओं पर केंद्रित विषयगत सत्र शामिल होंगे।
इन सत्रों में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के नेतृत्व में कुल 36 विषयगत चर्चाएं होंगी। इनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विशेषज्ञों का सहयोग रहेगा। सम्मेलन में चार आईआईटी, छह आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (एनएलयू) और आईआईएमसी सहित कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थान भी भाग लेंगे।
इसके अलावा चुनाव आयोग विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के साथ 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें आयोजित करेगा, जिनमें चुनावी चुनौतियों पर चर्चा और आपसी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इस अवसर पर आयोग अपनी सभी चुनाव संबंधी सूचनाओं और सेवाओं को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआई-नेट (ईसीआईनेट) का औपचारिक शुभारंभ भी करेगा।
सम्मेलन के साथ एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारत में चुनाव कराने की व्यापक प्रक्रिया और जटिलताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव संचालन जैसे चुनाव आयोग के दो प्रमुख स्तंभों को मजबूत करने के लिए हाल के वर्षों में की गई पहलों को भी दर्शाया जाएगा।