प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : आगामी 23 जनवरी को नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती से पहले उनके परिवार के सदस्यों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व भाजपा नेता और नेताजी के परपोते चंद्र कुमार बोस सहित बोस परिवार के पांच सदस्यों को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत सुनवाई के लिए नोटिस भेजी गयी है।
नोटिस की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। सोशल मीडिया पर भी सवाल उठे कि क्या नेताजी के परिवार को अब अपनी नागरिकता साबित करनी होगी। विवाद बढ़ने पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि चंद्र बोस द्वारा जमा किए गए एनुमरेशन फॉर्म में ‘लिंकेज’ से संबंधित कॉलम खाली था, इसी कारण नियमों के तहत उन्हें अन्य मतदाताओं की तरह सुनवाई के लिए बुलाया गया।
सोमवार सुबह ‘सन्मार्ग’ से खास बातचीत में चंद्र कुमार बोस ने बताया कि उन्हें 16 जनवरी को सुनवाई के लिए बुलाया गया था, लेकिन आयोग यह स्पष्ट नहीं कर सका कि उन्हें क्यों तलब किया गया। पासपोर्ट देखने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि वे अकेले नहीं हैं, परिवार के पांच सदस्यों को नोटिस भेजी गयी है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। चंद्र बोस ने यह भी कहा कि वे पहले दो बार आम चुनाव लड़ चुके हैं और उनके सभी हलफनामे आयोग के पास पहले से मौजूद हैं।
इसके बावजूद इस तरह की प्रक्रिया आम लोगों के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है, जिन्हें लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 23 जनवरी को नेताजी जयंती के अवसर पर कोलकाता में नेताजी की प्रतिमा स्थल से वह चुनाव आयोग पर निशाना साध सकती हैं।