बेंगलुरु : कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियंक खरगे का कहना है कि अगर कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका साबित होती है तो वह राजनीति से संन्यास लेने को तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी बिना किसी दस्तावेज या सबूत के केपीएससी की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं।
एचडी कुमारस्वामी का आचरण उचित नहीं
प्रियंक खरगे ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री के पद पर रह चुके व्यक्ति के लिए इस तरह का आचरण उचित नहीं है। प्रियंक ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘जो लोग मेरे खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, उन्हें दस्तावेजों के साथ सामने आना चाहिए। अगर आरोपों के समर्थन में सबूत हैं तो जांच होने दीजिए और सच्चाई सामने आने दीजिए। लेकिन बिना दस्तावेज के लगातार आरोप लगाना ‘हिट एंड रन’ की राजनीति है और कुमारस्वामी के लिए यह एक आदत बन गई है।’’ उन्होंने दावा किया कि कुमारस्वामी हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यालय गए थे।
शाह ने दिया है निशाना बनाने का ठेका
प्रियंक खरगे ने आरोप लगाया कि संगठन या केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने जद(एस) नेता को उन्हें निशाना बनाने का ‘‘ठेका’’ दिया है, क्योंकि भाजपा नेता ऐसा करने में ‘‘सक्षम नहीं’’ हैं। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर केपीएससी से जुड़े किसी भी मामले में मेरी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका साबित होती है तो मैं राजनीतिक संन्यास लेने को तैयार हूं। लेकिन अगर भाजपा और जद(एस) की इसमें कोई भूमिका थी तो क्या वे भी ऐसा करने को तैयार हैं?’’ उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग में 24 सहायक कार्यकारी अभियंता (एईई) पदों पर भर्ती को लेकर कुमारस्वामी पर ‘‘झूठा प्रचार’’ करने का आरोप लगाया। कुमारस्वामी ने हाल में प्रियंक खरगे के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती सिद्धरमैया सरकार में विभाग का प्रभार संभालने के दौरान उन्होंने केपीएससी के माध्यम से 24 एईई (सहायक कार्यकारी इंजीनियर) पदों पर भर्ती की अनुमति दी थी।
केपीएससी को आगाह किया गया था
प्रियंक खरगे ने कहा कि एईई उम्मीदवारों की नियुक्ति में ओएमआर शीट से कथित छेड़छाड़, सीसीटीवी फुटेज गायब होने और प्रक्रियागत उल्लंघन संबंधी चिंताएं अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही केपीएससी के समक्ष उठाई गई थीं, लेकिन इसके बावजूद नियुक्तियों को आगे बढ़ने दिया गया। उन्होंने कहा कि केपीएससी की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के लिए अलग-अलग संस्थान और अधिकारी जिम्मेदार होते हैं, जिनमें परीक्षा आयोजित करना, उम्मीदवारों की चयन सूची प्रकाशित करना और अंतिम सूची संबंधित विभाग को भेजना शामिल है। प्रियंक ने सवाल किया, ‘‘ऐसी स्थिति में केपीएससी में कथित अनियमितताओं के लिए सीधे एक मंत्री को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास क्यों किया जा रहा है?’’
जांच और समीक्षा जारी
उन्होंने बताया कि कुछ उम्मीदवारों की चयन सूचियों पर आपत्तियां आने के बाद केपीएससी ने एक समीक्षा समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि जांच और समीक्षा जारी है तथा जांच में यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक चरण में निर्णय किस अधिकारी ने लिया, न कि राजनीतिक रूप से किसी व्यक्ति को निशाना बनाया जाना चाहिए। प्रियंक ने विपक्षी नेताओं को चुनौती दी कि यदि उनके पास केपीएससी मामले में उनकी भूमिका से संबंधित दस्तावेज हैं तो वे उन्हें सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि भर्ती में अनियमितताओं का असर युवाओं के रोजगार और उनके भविष्य पर पड़ सकता है। उन्होंने भाजपा और जद(एस) नेताओं से उनकी पिछली सरकार के कार्यकाल की घटनाओं को याद रखने को कहा।
भाजपा नेताओं के नाम सामने आए थे
प्रियंक खरगे ने कहा, ‘‘पिछली भाजपा सरकार के दौरान पीएसआई भर्ती घोटाले को लेकर आरोप सामने आए थे। इस मामले में भाजपा नेताओं के नाम भी सामने आए थे। वर्तमान मुद्दे पर सवाल उठाने वाले लोगों ने उस समय क्या रुख अपनाया था, इसे लोग नहीं भूलेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाली किसी भी अनियमितता का बचाव करने का सवाल ही नहीं उठता। जो भी जिम्मेदार हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।’’ राष्ट्रीय स्तर पर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों को हुई परेशानियों का जिक्र करते हुए प्रियंक खरगे ने कुमारस्वामी की इस मुद्दे पर चुप्पी पर भी सवाल उठाया।
प्रियंक ने सवाल उठाया
उन्होंने पूछा, ‘‘जब छात्र नीट के मुद्दे को लेकर परेशान थे और आत्महत्या जैसी घटनाएं हुईं, तब कुमारस्वामी ने उसी तरह सवाल क्यों नहीं उठाए?’’ मंत्री ने जांच एजेंसियों से केपीएससी में कथित अनियमितताओं के लिए वास्तव में जिम्मेदार लोगों की पहचान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बिचौलियों, अधिकारियों और राजनीतिक संपर्क रखने वाले किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच की जानी चाहिए, चाहे वह कोई भी हो। प्रियंक खरगे ने कहा कि कुमारस्वामी अगर अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश करते हैं तो सरकार उनका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाना, उन्हें मीडिया में प्रसारित करवाना और फिर सबूत दिए बिना पीछे हट जाना जिम्मेदार राजनीति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं के रोजगार और भविष्य को प्रभावित करने वाली किसी भी भर्ती संबंधी अनियमितता को गंभीरता से लेती है और मानती है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।