देवघर : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को चुनाव आयोग में कथित मतभेदों को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके पास ऐसा मजबूत संस्थागत ढांचा है, जो आंतरिक मुद्दों से निपटने में सक्षम है। सरमा ने विपक्ष पर आयोग के कामकाज को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। सरमा झारखंड के देवघर जिले में एक मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों के संबंध में सवाल किया।
‘आयोग का ढांचा ऐसे मुद्दों से निपटने में सक्षम’
सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक प्राधिकरण है और उसका अपना स्थापित ढांचा है। उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर उठने वाले किसी भी मुद्दे से निपटने के लिए उसकी संस्थागत व्यवस्था पर्याप्त है। मुख्यमंत्री ने कहा, “चुनाव आयोग एक संवैधानिक प्राधिकरण है और उसका अपना स्थापित ढांचा है। हमें इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। इसका ढांचा सामने आने वाले किसी भी मुद्दे से निपटने के लिए पर्याप्त है।”
विपक्ष पर EC के काम को दबाने का आरोप
जब सरमा से पूछा गया कि चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का विरोध उचित है या नहीं, तो उन्होंने विपक्ष के रुख को गलत बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष आयोग के काम को दबाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अपना काम कर रहा है और जो लोग विपक्ष के निर्देशों का पालन नहीं करते, उनके खिलाफ विपक्ष की ओर से राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
SIR को लेकर सामने आई थी आपत्तियों की रिपोर्ट
सरमा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची के प्रबंधन और SIR से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं।
EC ने मतभेद की बात से किया इनकार
वहीं, चुनाव आयोग ने बुधवार को अपने भीतर किसी तरह के संस्थागत मतभेद या विभाजन की बात से इनकार किया। आयोग ने कहा कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, टिप्पणियां और सुझाव देना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग के अनुसार, उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत काम करता है। उसके मुताबिक, आंतरिक स्तर पर सुझाव या तकनीकी टिप्पणियां चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।
राजनीतिक विवाद के बीच आया बयान
SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष की आलोचना और आयोग की ओर से स्पष्टीकरण के बीच सरमा का बयान सामने आया है। उन्होंने आयोग की संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि चुनाव आयोग के पास अपने कामकाज से जुड़े मुद्दों को संभालने के लिए पर्याप्त तंत्र मौजूद है।