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हैंड एम्ब्रॉयडरी कारीगरों को मिला सशक्तिकरण; कोलकाता में दीक्षांत समारोह आयोजित

एसेन्सिव एजु स्किल फाउंडेशन ने जीनियस फाउंडेशन के सहयोग से हैंड एम्ब्रॉयडरी कारीगरों के लिए संचालित एक वर्षीय स्किल, उद्यमिता विकास एवं बाज़ार संपर्क कार्यक्रम का सफल समापन कोलकाता के होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल में आयोजित दीक्षांत समारोह के माध्यम से किया।

कोलकाता : एसेन्सिव एजु स्किल फाउंडेशन ने जीनियस फाउंडेशन के सहयोग से हैंड एम्ब्रॉयडरी कारीगरों के लिए संचालित एक वर्षीय स्किल, उद्यमिता विकास एवं बाज़ार संपर्क कार्यक्रम का सफल समापन कोलकाता के होटल हिंदुस्तान इंटरनेशनल में आयोजित दीक्षांत समारोह के माध्यम से किया। यह पहल संरचित कौशल प्रशिक्षण और सतत बाज़ार एकीकरण के ज़रिये कारीगर आधारित आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई।

जीनियस एचआरटेक लिमिटेड (पूर्व में जीनियस कंसल्टेंट्स लिमिटेड) की सीएसआर इकाई जीनियस फाउंडेशन के तहत लागू इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक हैंड एम्ब्रॉयडरी कारीगरों के तकनीकी कौशल, उद्यमिता क्षमता और संगठित बाज़ार तक पहुंच को मज़बूत करना था। कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में कश्मीर के कारीगरों और पश्चिम बंगाल के स्थानीय बाज़ारों के बीच स्थायी बाज़ार संपर्क स्थापित करना शामिल रहा, साथ ही क्षेत्रीय कारीगरों एवं आपूर्तिकर्ताओं को व्यापक मूल्य श्रृंखला से जोड़ा गया।

समारोह में जीनियस एचआरटेक लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री आर. पी. यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार के श्रम विभाग की अतिरिक्त सचिव श्रीमती शौन सेन विशिष्ट अतिथि थीं। इस अवसर पर जीनियस एचआरटेक लिमिटेड, एसेन्सिव ग्रुप, एनएसडीसी, भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय तथा द बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

अपने संबोधन में श्री यादव ने कहा कि प्रभावी सीएसआर केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्यमिता और सुनिश्चित बाज़ार पहुंच के माध्यम से दीर्घकालिक आजीविका सृजन पर केंद्रित होना चाहिए। वहीं श्रीमती सेन ने एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने और राज्य में समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में कौशल विकास एवं बाज़ार संपर्क की अहम भूमिका को रेखांकित किया। एसेन्सिव ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के चेयरमैन श्री अभिजीत चटर्जी ने पारंपरिक शिल्प को संरक्षित रखते हुए मेंटरशिप, उद्यमिता उन्मुखीकरण और संरचित बाज़ार संपर्क से समर्थित समग्र आजीविका पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रोजेक्ट फ़िल्म का प्रदर्शन, वर्चुअल प्रमाणपत्र वितरण समारोह तथा लाभार्थी कारीगरों के साथ संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने बेहतर कौशल, आय संभावनाओं में वृद्धि और आत्मविश्वास में सकारात्मक बदलाव के अनुभव साझा किए। यह पहल सहयोगात्मक सीएसआर हस्तक्षेपों के माध्यम से कारीगरों को सशक्त बनाने, एमएसएमई को मज़बूत करने और सतत जमीनी आर्थिक विकास में योगदान देने का एक प्रभावशाली उदाहरण बनकर उभरी।

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