देश/विदेश

संवैधानिक चुनौती के बीच अटल रहे राज्यपाल आर.एन. रवि

बार-बार घिरे विवादों में लेकिन रहे कर्तव्यनिष्ठ

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे के बाद केंद्र ने पूर्व आईपीएस और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रवीन्द्र नारायण रवि को राज्य का अंतरिम राज्यपाल नियुक्त किया है। रवि वर्तमान में तमिलनाडु के राज्यपाल हैं और अब चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में भी राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे।

1952 में पटना में जन्मे रवि का करियर केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई और खुफिया ब्यूरो में रहा है। प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत है, लेकिन राजनीतिक मामलों में उनका नाम अक्सर विवादों से जुड़ा रहा है। बंगाल से पहले वे नागालैंड और तमिलनाडु के राज्यपाल नियुक्त किए गए थे। तमिलनाडु में उन्होंने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के साथ टकराव की स्थिति पैदा की। नागालैंड सरकार भी रवि के कामकाज से खुश नहीं थी और उनका आरोप था कि रवि सरकार के मामलों में हस्तक्षेप करते थे।

साल 2024 में रवि ने तमिलनाडु विधानसभा में राष्ट्रीय गान के संबंध में विवाद खड़ा किया और सरकार द्वारा लिखित भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया। ये घटनाएं उनकी संवेदनशील राजनीतिक भूमिका और विवादास्पद निर्णयों को उजागर करती हैं। अब रवि तमिलनाडु के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के भी अंतरिम राज्यपाल होंगे।

यह नियुक्ति चुनाव से पहले इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ममता बनर्जी और स्टालिन - दोनों को ही शीर्ष विपक्षी नेताओं में गिना जाता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि रवि के इस उदय और विवाद ने उनके राजनीतिक करियर को और ध्यानाकर्षक बना दिया है। चुनावी राज्यों में उनकी भूमिका, केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक और राजनीतिक संतुलन पर एक महत्वपूर्ण परीक्षण साबित हो सकती है।

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