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गुवाहाटी विश्वविद्यालय ने PGSU चुनाव में गड़बड़ी के आरोप को किया खारिज

कहा, सभी फैसले निर्धारित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत लिए गए

Krishna Das Parth

गुवाहाटी : गुवाहाटी विश्वविद्यालय ने पोस्ट-ग्रेजुएट स्टूडेंट्स यूनियन (PGSU) चुनाव 2026-27 में नामांकन और शिकायत प्रक्रिया को लेकर फैलाई जा रही “गलत और गुमराह करने वाली जानकारी” को खारिज किया है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों की पात्रता और नामांकन से जुड़े सभी फैसले आधिकारिक रिकॉर्ड तथा निर्धारित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, मामले पर रिटर्निंग ऑफिसर, चुनाव ट्रिब्यूनल, अपील सुनवाई समिति और शिकायत निवारण सेल ने अलग-अलग स्तर पर विचार किया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. उत्पल शर्मा ने कहा कि संस्थान की जिम्मेदारी है कि मामले से जुड़े पूरे तथ्य रिकॉर्ड पर रखे जाएं। उन्होंने किसी खास छात्र को निशाना बनाए जाने के आरोप से इनकार किया। शर्मा ने कहा, “इस मामले को तय संस्थागत तरीकों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर निपटाया गया है। किसी खास छात्र को निशाना बनाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

23 सितंबर को सामने आया मामला

विश्वविद्यालय के मुताबिक, 23 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नयन आकाश बोरा और प्रतीक शर्मा की पात्रता से जुड़ी जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर के संज्ञान में लाई गई। इसके बाद मामला चुनाव ट्रिब्यूनल को भेजा गया। ट्रिब्यूनल ने दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पर विचार नहीं करने की सलाह दी। इसके बाद 24 सितंबर की चुनाव अधिसूचना में नामांकन रद्द किए जाने का उल्लेख किया गया। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पर कार्रवाई का आधार एक साथ दो पोस्ट-ग्रेजुएट कार्यक्रमों में दाखिला होना बताया गया। चुनाव ट्रिब्यूनल ने अपने विचार में विश्वविद्यालय के पीजी प्रवेश संबंधी नियमों और अप्रैल 2022 की यूजीसी गाइडलाइन का हवाला दिया था।

अपील का भी दिया गया मौका

विश्वविद्यालय ने बताया कि नयन आकाश बोरा ने 25 और 26 सितंबर को अपील दायर की। इसके बाद कानूनी राय लेने के बाद 26 सितंबर को अपील सुनवाई समिति का गठन किया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार, बोरा को समिति के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया और सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इसके बाद संबंधित पक्षों को निर्णय की जानकारी दी गई। 27 सितंबर को शिकायत निवारण सेल का गठन किया गया। विश्वविद्यालय क्लासेस के सचिव डॉ. रंजन कुमार काकती ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखने की जरूरत है। उनके अनुसार, यह कहना सही नहीं है कि विश्वविद्यालय ने मनमाने तरीके से कार्रवाई की या संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया।

डुअल एनरोलमेंट पर उठे सवाल

विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके रिकॉर्ड में संबंधित छात्र के एक ही समय में दो पोस्ट-ग्रेजुएट कार्यक्रमों में नामांकन की जानकारी दर्ज है। विश्वविद्यालय के अनुसार, छात्र ने पहले फीस-माफी श्रेणी में एक पीजी कार्यक्रम में प्रवेश लिया था, लेकिन पहले और दूसरे सेमेस्टर के सभी पेपर पास नहीं किए। इसके बाद उसने फीस-माफी श्रेणी में ही दूसरे पीजी कार्यक्रम में प्रवेश लिया। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि छात्र पहले कार्यक्रम के तीसरे सेमेस्टर के छात्र के रूप में हॉस्टल में रह रहा था, जबकि दूसरे कार्यक्रम के पहले सेमेस्टर के छात्र के रूप में भी उसे हॉस्टल सुविधा प्रदान की गई थी। विश्वविद्यालय के मुताबिक, दूसरी सुविधा स्वीकार नहीं की गई, लेकिन पहले कार्यक्रम से जुड़ी हॉस्टल सुविधा जारी रही। काकती ने कहा कि यह केवल तकनीकी मामला नहीं है, क्योंकि फीस-माफी और संस्थागत सुविधाओं से जुड़े नियमों का प्रभाव अन्य पात्र छात्रों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा, “कोई पुरानी परंपरा ऐसी चीज को जारी रखने के लिए मिसाल नहीं बन सकती जो तय नियमों के मुताबिक नहीं है।”

नियमों के तहत चुनाव कराने पर जोर

PGSU चुनाव 2026-27 के रिटर्निंग ऑफिसर प्रो. एस.के. सिंह ने कहा कि चुनाव निर्धारित नियमों और संस्थागत व्यवस्था के तहत कराया जा रहा है। उन्होंने लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र चुनावों में उम्मीदवारों की पात्रता की जांच, पारदर्शी प्रक्रिया और शिकायत निवारण के लिए व्यवस्था जरूरी है। विश्वविद्यालय ने छात्रों से अपील की है कि वे अफवाहों के बजाय सत्यापित जानकारी और आधिकारिक रिकॉर्ड पर भरोसा करें। साथ ही कैंपस में शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है। विश्वविद्यालय ने दोहराया कि PGSU चुनाव 2026-27 की प्रक्रिया लागू नियमों के अनुसार जारी रहेगी और शिकायतों पर संबंधित संस्थागत मंचों के माध्यम से विचार किया जाएगा।

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