आइजोल : गौहाटी उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थ से जुड़े एक मामले में निचली अदालत से दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद 2024 में 10 साल के कारावास की सजा पाने वाले आरोपी को बड़ी राहत मिली है। मामला मिजोरम के चंफाई जिले का है। म्यांमा सीमा के पास स्थित जोखावतार के निवासी लालरोसांगा ने चंफाई की विशेष अदालत के उस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें उसे मादक पदार्थ मामले में दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। लालरोसांगा ने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए गौहाटी उच्च न्यायालय में आपराधिक अपील दायर की थी। अपील पर न्यायमूर्ति कौशिक गोस्वामी की पीठ ने मंगलवार को सुनवाई की। पीठ ने मामले से संबंधित रिकॉर्ड और निचली अदालत में हुई कार्यवाही का अवलोकन करने के बाद आरोपी की अपील स्वीकार कर ली। न्यायमूर्ति गोस्वामी ने अपने विस्तृत फैसले में विशेष अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश में हस्तक्षेप करते हुए लालरोसांगा को आरोपों से बरी कर दिया।
तत्काल रिहाई का आदेश
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आरोपी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया। अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि तत्काल रिहाई आदेश जारी किया जाए और आवश्यक अनुपालन के लिए उसे संबंधित प्राधिकारी के पास तुरंत भेजा जाए। इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बरी किए गए व्यक्ति की रिहाई में अदालत के फैसले के बाद अनावश्यक देरी न हो। मिजोरम का चंफाई जिला म्यांमा की सीमा से सटा हुआ है और क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में विशेष अदालतों द्वारा सुनवाई की जाती है। हालांकि, इस मामले में उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया। उच्च न्यायालय के फैसले में मामले की सुनवाई और रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद दोषसिद्धि को बरकरार रखने का आधार नहीं पाया गया, जिसके बाद अपील मंजूर कर ली गई।