सांकेतिक तस्वीर 
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24 साल पुराने मामले में पूर्व कार्यपालन यंत्री को पांच साल का सश्रम कारावास

आय से अधिक संपत्ति का मामला

25 लाख रुपये जुर्माना, मंडलेश्वर उपजेल भेजा गया

खरगोन : मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के 24 साल पुराने मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री कैलाशचंद्र परवाल को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। फैसला प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष अदालत के न्यायाधीश राजकुमार चौहान ने सुनाया। सजा के बाद परवाल को मंडलेश्वर उपजेल भेज दिया गया।

रिश्वत की शिकायत से शुरू हुई थी कार्रवाई

विशेष लोक अभियोजक एवं सहायक निदेशक, अभियोजन प्रकाश सोलंकी के अनुसार, परवाल के खिलाफ मामला वर्ष 2002 में दर्ज हुआ था। छह सितंबर 2002 को धार निवासी शैलेन्द्र जोशी ने लोकायुक्त में शिकायत की थी कि तत्कालीन कार्यपालन यंत्री ने उनसे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी है। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए परवाल को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

जांच में सामने आई आय से अधिक संपत्ति

रिश्वत मामले की विवेचना के दौरान परवाल की ज्ञात आय के मुकाबले अधिक संपत्ति और खर्च का पता चला। इसके बाद लोकायुक्त ने खरगोन, देवास और इंदौर स्थित उनके आवासों की तलाशी ली। जांच एजेंसी ने बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और विभिन्न निवेशों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की।

ज्ञात आय 34.64 लाख, खर्च 1.08 करोड़ रुपये

जांच के अनुसार, एक अगस्त 1981 से आठ सितंबर 2002 के बीच परवाल की ज्ञात स्रोतों से कुल आय 34,64,528 रुपये थी। इसी अवधि में उनके द्वारा 1,08,70,213 रुपये खर्च किए जाने का पता चला। इस आधार पर 74,05,690 रुपये की संपत्ति और खर्च उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से अनुपातहीन पाए गए। यह राशि उनकी ज्ञात आय से 213.75 प्रतिशत अधिक थी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र

लोकायुक्त इंदौर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ई), सहपठित धारा 13(2), के तहत मामला दर्ज कर जांच पूरी की। इसके बाद मंडलेश्वर स्थित विशेष अदालत में आरोपपत्र पेश किया गया।

अभियोजन ने पेश किए 500 से अधिक दस्तावेज

मामले की लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने करीब 131 गवाहों के बयान दर्ज कराए और 500 से अधिक दस्तावेज अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष ने उच्च न्यायालय की अनुमति से सात गवाह प्रस्तुत किए तथा करीब 350 दस्तावेज दाखिल किए।

साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सुनाई सजा

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद परवाल को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का दोषी माना। इसके बाद उन्हें पांच वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। फैसला आने के बाद पुलिस ने दोषी परवाल को मंडलेश्वर उपजेल भेज दिया।

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