काठमांडू : नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी 5,130 लापता लोगों की तलाश जारी है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, आपदा में अब तक करीब 1,400 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13,676 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। लापता लोगों में करीब 30 देशों के 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई। चीन में भी 43 लोगों की मौत हुई है, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। रसुवा और नुवाकोट की बाढ़ प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में लापता कर्मचारियों की तलाश के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल, परियोजना कर्मियों और विदेशी विशेषज्ञों की टीमें अभियान चला रही हैं। चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में बचाव दल करीब 115 मीटर तक पहुंच चुका है। वहीं, अपर त्रिशूली-1 परियोजना की मुख्य सुरंग में संयुक्त टीम करीब 400 मीटर अंदर तक पहुंचकर लापता कर्मचारियों की तलाश कर रही है। रसुवागढ़ी, रसुवा भोटेकोशी, लांगटांग, त्रिशूली-3ए और अपर त्रिशूली-3बी परियोजनाओं में भी तलाशी अभियान जारी है।
जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए नेपाल-चीन सहयोग जरूरी
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाओं के बढ़ते खतरे को देखते हुए नेपाल और चीन को पारंपरिक सीमा प्रबंधन से आगे बढ़कर पारिस्थितिकी, जलवायु सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने प्रौद्योगिकी, व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। खनाल ने सीमा पार आपदाओं का प्रभाव कम करने के लिए वास्तविक समय में उपग्रह आंकड़ों के आदान-प्रदान, मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव रखा।