कर्नाटक की नई कांग्रेस सरकार के गठन के महज कुछ दिनों के भीतर पैदा हुआ पहला बड़ा राजनीतिक संकट फिलहाल टल गया है। मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे की घोषणा से मचे सियासी घमासान को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने देर रात हुई लंबी बैठक के बाद शांत कर दिया। सरकार ने पूरे विवाद को “परिवार का मामला” बताते हुए कहा कि अब सब कुछ सुलझा लिया गया है।
दरअसल, रामलिंगा रेड्डी विभागों के बंटवारे को लेकर नाराज चल रहे थे। उनका दावा था कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने का आश्वासन मिला था, लेकिन बाद में उन्हें जल संसाधन विभाग सौंप दिया गया। इसी बात से असंतुष्ट होकर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया था, जिससे सरकार के भीतर हलचल मच गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने शुक्रवार देर रात जयनगर स्थित एक होटल में रेड्डी के साथ करीब ढाई घंटे तक बैठक की। इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और रेड्डी के करीबी भी मौजूद रहे। बैठक देर रात से लेकर शनिवार तड़के तक चली, जिसके बाद दोनों नेताओं ने विवाद खत्म होने के संकेत दिए।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मीडिया से कहा कि यह महज एक गलतफहमी थी, जिसे बातचीत के जरिए दूर कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को सम्मान और संतुलित जिम्मेदारियां दी जा रही हैं और सरकार पूरी एकजुटता के साथ काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनका और रेड्डी का संबंध दशकों पुराना है और आपसी संवाद से हर मुद्दा सुलझाया जा सकता है।
वहीं, रामलिंगा रेड्डी ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने जो कहा है, वही सही है। उनके इस बयान से साफ संकेत मिला कि विवाद अब समाप्त हो चुका है और इस्तीफा वापस लिया जा सकता है।
हालांकि, इस घटनाक्रम ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है। इससे पहले भी वरिष्ठ नेता के.एच. मुनियप्पा ने विभागों के बंटवारे को लेकर नाराजगी जताई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार को अंदरूनी असंतोष को समय रहते संभालना होगा, वरना आगे चलकर यह बड़ी चुनौती बन सकता है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री शिवकुमार के हस्तक्षेप से तत्काल संकट टल गया है और सरकार ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है।