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चेनपुर के किसानों ने की कीट प्रकोप और अपर्याप्त वर्षा पर तत्काल कार्रवाई की मांग

कीटों के हमले से किसानों की बढ़ी चिंता

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम :ग्राम पंचायत चेनपुर के अंतर्गत आने वाले बजोटा, चेनपुर और हंसपुरी गांवों के किसान इस खरीफ सीजन में दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक ओर पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण धान की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तेजी से फैल रहे कीट प्रकोप ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। कीटों के हमले से खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट की आशंका उत्पन्न हो गई है। ग्राम पंचायत चेनपुर के प्रधान जॉनसन केरकेट्टा ने बताया कि हंसपुरी गांव के लगभग सभी परिवार अपनी आजीविका के लिए धान की खेती पर निर्भर हैं, जबकि बजोटा गांव के अधिकांश किसान भी धान की खेती करते हैं। वहीं चेनपुर गांव के किसान धान के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती भी करते हैं। वर्तमान समय में अनेक किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है तथा कई किसानों ने धान की रोपाई का कार्य भी पूरा कर लिया है। हालांकि, तेजी से फैल रहे कीट प्रकोप के कारण फसल को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत चेनपुर के प्रधान ने उत्तर एवं मध्य अंडमान जिले के उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर प्रभावित गांवों का तत्काल निरीक्षण करने के लिए कृषि विभाग के विशेषज्ञों की टीम भेजने का अनुरोध किया है। उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि प्रभावित किसानों को आवश्यक कीटनाशक, तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि संबंधी सहायता तथा सरकार की उपलब्ध योजनाओं के अंतर्गत हर संभव राहत प्रदान की जाए, ताकि किसानों को हो रहे नुकसान को कम किया जा सके। प्रधान जे. केरकेट्टा ने आशा व्यक्त की कि प्रशासन यदि शीघ्र हस्तक्षेप करता है तो खेतों में खड़ी धान की फसल को बचाया जा सकेगा तथा किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से जुड़े हजारों परिवार इस समय प्रशासन की त्वरित सहायता की अपेक्षा कर रहे हैं। किसानों ने भी प्रशासन से अपील की है कि इस पूरे मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि धान की फसल को बचाया जा सके और किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।

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