CEC ज्ञानेश कुमार और दो ECs सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच ‘मतभेद’ के बीच शनिवार को हुई चुनाव आयोग की बैठक 
देश/विदेश

विवाद के बीच चुनाव आयोग की बैठक, SIR पर दी सफाई

चुनाव आयोग ने दोहराया दावा : सभी फैसले सर्वसम्मति से लिये गये

Lokendra Bahuguna

नयी दिल्ली : मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच ‘मतभेदों को लेकर विवाद’ के बीच शनिवार को निर्वाचन आयोग ने SIR पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने फिर दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े सभी फैसले, जिसमें देशभर में चल रही प्रक्रिया भी शामिल है, पूरे आयोग की सर्वसम्मति से मंजूर किये गये हैं। आयोग ने साथ ही उन मतदाताओं के लिए प्रक्रिया आसान करने के कई उपायों की जानकारी दी, जिन्हें ‘अनमैप्ड’ या जानकारी में तार्किक गड़बड़ी के चलते नोटिस जारी की गयी हैं।

मतदाताओं को ‘राहत’

बैठक में आयोग ने फैसला किया कि मौजूदा SIR के दौरान जिन मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी (तार्किक गड़बड़ी) के आधार पर नोटिस मिली है, उन्हें सामान्य तौर पर मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ऐसे मतदाताओं के घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटायेंगे। इन दस्तावेजों को ECINet पर अपलोड किया जायेगा, जिसके आधार पर ERO आगे फैसला ले सकेंगे।

खास मामलों में होगी सुनवाई, ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा

आयोग ने कहा कि केवल विशेष मामलों में ही सुनवाई की जरूरत होगी। ऐसी सुनवाई भी अधिकतर ऑनलाइन माध्यम से करायी जायेगी। अगर अनुमति दी जाती है तो मतदाता की ओर से उसके परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी सुनवाई में शामिल हो सकेगा। आयोग ने कहा कि ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और बेहतर बनाया जायेगा, ताकि मतदाताओं को प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो।

गरीबों और बेघर लोगों के लिए स्पेशल कैंप

आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से हेल्प डेस्क और स्पेशल कैंप लगाने का भी निर्देश दिया है। इन सुविधाओं का विशेष ध्यान नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए रखने को कहा गया है, ताकि SIR की प्रक्रिया में ऐसे लोगों को भी मदद मिल सके।

विशेष पंजीकरण अभियान के निर्देश

ECI ने बताया कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम SIR की प्रक्रिया के दौरान या उसके बाद छूट गये हैं, वे नाम जुड़वाने के लिए संबंधित ERO के पास ‘कन्टिनुअस अपडेटिंग’ के तहत आवेदन कर सकते हैं। इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाता भी शामिल हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) और EROs को विशेष पंजीकरण अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

IT डिवीजन विवाद पर भी सफाई

आयोग ने अपने अधिकारी और IT डिवीजन से जुड़े विवाद पर भी स्थिति साफ की। आयोग ने कहा कि कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजा गया पत्र उसके या उसके IT डिवीजन से जुड़े किसी नीतिगत फैसले से संबंधित नहीं था। मामला आयोग में प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) पर आये एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। दो आयुक्तों के निर्देशों की ‘अनदेखी’ पर आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी ने काम के बंटवारे को लेकर जो आदेश जारी किये थे, उन्हें दो आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किया गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन उपायुक्त से IT डिवीजन की निगरानी का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया।

ECINet में रोल-बेस्ड एक्सेस, सिस्टम की होगी समीक्षा

आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनके कानूनी अधिकारों के आधार पर ECINet सिस्टम में रोल-बेस्ड एक्सेस दिया जाता है। सिस्टम की समीक्षा के लिए एक समिति बनायी जायेगी। इसकी अध्यक्षता एक वरिष्ठ निर्वाचन उपायुक्त करेंगे और इसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। यह समिति संबंधित कानूनों और नियमों के पालन के लिहाज से सिस्टम की समीक्षा करेगी।

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