द्वीपवासियों ने विरोध जताया, शांतिपूर्ण बंद से स्पष्ट हुआ जनभावना
सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने संसद में शून्यकाल के दौरान द्वीपवासियों की लंबे समय से चली आ रही केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग को जोरदार तरीके से उठाया। केंद्र सरकार का ध्यान इस महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए सांसद ने अपील की कि द्वीपों में प्रस्तावित डीम्ड यूनिवर्सिटी की योजना को निरस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि द्वीपवासियों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है और इसके विरोध में पूरे अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में शांतिपूर्ण बंद भी आयोजित किया गया था, जो जनभावनाओं और पूर्ण केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। बिष्णु पद रे ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में देश के अन्य हिस्सों की तर्ज पर एक पूर्ण केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2014 से 2021 के बीच भारत सरकार द्वारा लद्दाख, दिल्ली, आंध्र प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में 9 केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में भी केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि द्वीपों में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम होगा, जिससे स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा के व्यापक अवसर प्राप्त होंगे। सांसद ने प्रधानमंत्री से द्वीपों की भौगोलिक स्थिति और लंबे समय से चली आ रही शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि जब तक द्वीपों में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक यहां के सभी महाविद्यालयों की पुडुचेरी विश्वविद्यालय से संबद्धता जारी रखी जाए। बिष्णु पद रे ने पुनः दोहराया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की मांग द्वीपवासियों की वैध और उचित आकांक्षा है, जिस पर केंद्र सरकार को शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि छात्रों और द्वीपों के भविष्य के विकास को नई दिशा मिल सके।