देश/विदेश

विकास निधि लौटने के मामलों में जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष एवं पार्षद कविता उदयकुमार ने उपराज्यपाल, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, सांसद, मुख्य सचिव तथा अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के सहायक सचिव को पत्र भेजकर विकास कार्यों के लिए स्वीकृत निधियों के उपयोग न होने तथा धनराशि वापस लौटने के मामलों में जिम्मेदारी तय करते हुए लापरवाह अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच प्रत्यक्ष कड़ी होते हैं। द्वीपवासी उन्हें अपनी समस्याओं को उठाने, आवश्यकताओं को प्रशासन तक पहुंचाने तथा जमीनी वास्तविकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का प्रस्ताव रखने के लिए चुनते हैं। इसके बावजूद विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धनराशि का समय पर उपयोग नहीं हो पाने और बार-बार निधियों के बिना खर्च हुए वापस लौट जाने से द्वीपवासियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन द्वीपों में आज भी बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं की अत्यधिक आवश्यकता है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कविता उदयकुमार ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि भारत सरकार के जनरल फाइनेंशियल रूल्स, 2017 के अनुसार विकास परियोजनाओं की स्वीकृति एवं उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित विभाग के सक्षम प्राधिकारी की होती है। निर्धारित समय सीमा के भीतर स्वीकृत धनराशि का उपयोग न कर पाना वित्तीय अनुशासन का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है। उन्होंने कहा कि डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स रूल्स, 1978 के तहत वित्तीय अधिकार प्राप्त प्रत्येक अधिकारी को उसे सौंपी गई सार्वजनिक धनराशि के उचित एवं समयबद्ध उपयोग के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी माना गया है। इसके अलावा केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 3(1)(ii) एवं 3(1)(iii) के अनुसार कर्तव्य के प्रति लापरवाही, सरकारी दायित्वों का लगातार निर्वहन न करना तथा अपने दायित्वों की उपेक्षा करना सरकारी कर्मचारी के लिए दुराचार की श्रेणी में आता है। इन नियमों के तहत प्रत्येक सरकारी कर्मचारी के लिए अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखना तथा लोक सेवक के अनुरूप आचरण करना अनिवार्य है। उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रशासनिक निष्क्रियता अथवा अनावश्यक विलंब के कारण विकास निधि समय पर खर्च नहीं हो पाती और वह वापस लौट जाती है, तो केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इन नियमों के अंतर्गत दोषी अधिकारियों पर चेतावनी, वेतनवृद्धि रोकना, पदावनति अथवा सेवा से बर्खास्तगी जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। कविता उदयकुमार ने उपराज्यपाल एवं प्रशासन से आग्रह किया है कि विकास निधि वापस लौटने के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, संबंधित केंद्रीय नियमों के तहत जवाबदेही तय की जाए, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में विकास निधियों का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए, ताकि द्वीपवासियों को विकास योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।


SCROLL FOR NEXT