नैशविले : अमेरिका के टेनेसी राज्य में 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को घातक इंजेक्शन देकर मृत्युदंड देने की कोशिश नाकाम हो गई। पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दी गईं, लेकिन उनकी मौत नहीं हुई। घटना के बाद गवर्नर बिल ली ने मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए और इस साल निर्धारित बाकी फांसियों को रोक दिया। पाइक को 1995 में अपनी सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। वह टेनेसी में करीब 200 वर्षों में मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला बनने वाली थीं। फांसी से करीब एक घंटे पहले छठी सर्किट अपील अदालत ने पाइक के वकीलों की याचिका पर अस्थायी रोक लगा दी थी। वकीलों ने उनके बचपन में हुए कथित यौन शोषण और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को मामले में पर्याप्त रूप से नहीं देखे जाने का तर्क दिया था। हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बाद में रोक हटा दी। अधिकारियों ने शाम 7:46 बजे पाइक को पेंटोबार्बिटल की पहली खुराक दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह इसके बाद भी होश में थीं और अपने हाथ में तेज दर्द की शिकायत कर रही थीं। रात 8:26 बजे दूसरी खुराक दी गई, लेकिन इसके बाद भी उनके जीवित होने के संकेत मिलते रहे। पाइक के वकीलों ने नसों तक पहुंच बनाने में दिक्कत, दवा और आपात चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। घटना के बाद गवर्नर बिल ली ने पूरे मामले की तीसरे पक्ष से व्यापक समीक्षा कराने का आदेश दिया। टेनेसी में फांसी की प्रक्रिया विफल होने का यह दूसरा मामला है।