वाशिंगटन : अमेरिका की एक संघीय अपीलीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ दिए गए उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें अधीनस्थ अदालत ने उच्च कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए एच-1बी वीजा पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के निर्णय को रद्द कर दिया था।
बोस्टन स्थित ‘फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने संघीय सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अमेरिकी जिला न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन के आठ जून के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। सोरोकिन ने इस शुल्क को कांग्रेस की मंजूरी के बिना लगाया गया अवैध कर बताते हुए रद्द कर दिया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष सितंबर में एक उद्घोषणा जारी कर नए एच-1बी वीजा प्राप्त करने पर 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने का निर्णय लिया था। एच-1बी वीजा एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनके पास विशेष क्षेत्रों में सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता होती है। अमेरिका की प्रौद्योगिकी कंपनियां हर वर्ष भारत और चीन जैसे देशों से हजारों विशेषज्ञ कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इसी वीजा पर निर्भर रहती हैं। अपीलीय अदालत ने 1989 में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कार्यपालिका (सरकार) को यह स्पष्ट रूप से दिखाना होगा कि कांग्रेस ने उस पर वित्तीय बोझ चाहे उसे ‘शुल्क’ कहा जाए या ‘कर’, लगाने का विवेकाधिकार स्पष्ट शब्दों में प्रदान किया है। अदालत ने कहा कि हालांकि, ट्रंप प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि इस मामले में कांग्रेस से स्पष्ट अधिकार मिलने की यह अनिवार्य शर्त क्यों लागू नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि यदि रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी जाती है, तो वादी राज्यों को कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा।
अमेरिका हर वर्ष 65,000 एच-1बी वीजा जारी करता है। इसके अलावा, उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा भी जारी किए जाते हैं। इन वीजा पर वर्तमान में सामान्यतः 2,000 से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक का शुल्क लिया जाता है।