देश/विदेश

कोर्ट के फैसले हिंदी में: साल के अंत तक पूरा होगा अनुवाद

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों का इस साल के अंत तक हिंदी भाषा में अनुवाद कर पूरा कर दिया जाएगा .

सर्जना शर्मा

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों का इस साल के अंत तक हिंदी भाषा में अनुवाद कर पूरा कर दिया जाएगा . केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के सचिव राजेश मणि ने मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में ये जानकारी दी। राजेश मणि ने कहा कि मंत्रालय ने अनुवादिनी संस्था को इस काम के लिए अनुबंध दे रखा है और कृत्रिम मेधा की मदद से ये काम हो रहा है । इससे हिंदी भाषी वकीलों को अपना पक्ष बेहतर तरीके से रखने में मदद मिलेगी। साथ ही उन्होंने बताया कि 7213 अधिसूचनाओं का हिंदी के अलावा मान्यता प्राप्त 16 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है ।

हिंदी को वैसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है लेकिन फिर भी ज्यादातर सरकारी कामकाज अंग्रेजी भाषा में ही किया जाता है । विधि एवं न्याय मंत्रालय की राजभाषा समिति के अध्यक्ष सांसद भर्तृहरि महताब ने कहा कि राजभाषा का प्रयोग कचहरियों में प्रयोग करना सबसे बड़ी चुनौती है। दो बार सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में याचिका दायर की जा चुकी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने दोनों बार याचिका रद्द कर दी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट का काम अंग्रेजी में ही होगा। भृतहरि ने विधि एवं न्याय राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) अर्जुन राम मेघवाल से अनुरोध किया कि एक बार केंद्र सरकार की हिंदी सलाहकार समितियों की ओर से उच्चतम न्यायालय में फिर से याचिका दायर करनी चाहिए कि अपनी भाषा में ही मुकदमों की सुनवाई हो। अदालतों को उपनिवेशी मानसिकता से बाहर निकलना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए । भृतहरि महताब ने कहा कि विधि एवं न्याय की भाषा की केवल अनुवाद नहीं बल्कि अनुवर्तन होना चाहिए।

विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हिंदी सलाहकार समिति को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अब वकीलों को हिंदी में जिरह करने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट के जो न्यायाधीश हिंदी समझते हैं उनके सामने हिंदी में जिरह करने की अनुमति दे दी गयी है हालांकि फैसला अंग्रेजी में ही लिखा जाएगा। मेघवाल ने ये भी बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में तीन न्यायाधीश ऐसे हैं जो केवल हिंदी में ही सुनवाई करते हैं। लखनऊ हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश तो अपने फैसले भी हिंदी में ही लिखते हैं उनको सम्मानित भी किया गया है। मेघवाल ने कहा कि अब निचली अदालतों में हर राज्य की क्षेत्रीय भाषा में जिरह शुरू हो गयी है ।

मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में हिंदी विशेषज्ञ , हिंदी प्राध्यापक और हिंदी साहित्यकार हैं उनसे विधि एवं न्याय मंत्री ने सुझाव मांगे । सलाहकारों ने अनेक सुझाव दिए जैसे कि अपना कानून अपनी भाषा अभियान चलाया जाए । फैसले हिंदी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी आए , कठिन शब्दों की जगह सरल शब्दों का प्रयोग हो कानूनी लेखन की कार्यशालाएं आयोजित की जाए।

हिंदी सचिवालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजभाषा विभाग चूंकि केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आता है मंत्रालय ने भारतीय बहुभाषी टूल बनाया है। गृहमंत्री अमित शाह आजकल हर प्रांत से उनकी भाषा में पत्राचार कर रहे हैं । राजभाषा ने जो शब्द सिंधु बनाया है उसमें विधि शब्दावली के शब्दों को भी समाहित किया गया है। कानून का काम हिंदी में ज्यादा से ज्यादा हो इसलिए अब साल में दो बार समिति की बैठक हुआ करेगी एक हिंदी भाषी राज्य में और दूसरी गैर हिंदी भाषी राज्य में।

SCROLL FOR NEXT