देश/विदेश

निजी फेरी किराए में 300 रुपये फ्यूल सरचार्ज पर कांग्रेस का विरोध

फ्यूल सरचार्ज वृद्धि पर कांग्रेस अध्यक्ष ने जताई चिंता

जॉन रॉबर्ट बाबू ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

पर्यटन उद्योग पर असर की आशंका

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जॉन रॉबर्ट बाबू ने निजी फेरी सेवाओं द्वारा टिकट पर 300 रुपये के अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज लगाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस अचानक बढ़ोतरी से पर्यटन उद्योग, ट्रैवल एजेंट्स और आम यात्रियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा, जिससे द्वीपों की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जॉन रॉबर्ट बाबू ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी सामने आई है कि हैवलॉक और नील द्वीप के लिए चलने वाली सभी निजी फेरियों ने प्रत्येक टिकट पर 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अंडमान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर है और यहां का अधिकांश व्यापार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यदि एक पर्यटक पर 900 रुपये तक का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, तो यह पर्यटन क्षेत्र के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि एक परिवार में पांच से छह सदस्य यात्रा करते हैं, तो कुल अतिरिक्त खर्च 5000 रुपये से 6000 रुपये तक पहुंच जाएगा, जिससे पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ सकती है। बाबू ने यह भी बताया कि पहले से ही हवाई किराए अधिक होने के कारण लोग अंडमान आने से हिचकते हैं और ऐसे में फेरी किराए में बढ़ोतरी स्थिति को और कठिन बना सकती है। जॉन रॉबर्ट बाबू ने प्रशासन, विशेषकर शिपिंग सेवा निदेशालय और उपराज्यपाल से अपील करते हुए कहा कि इस बढ़े हुए शुल्क को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन अस्थायी रूप से जेट्टी शुल्क, बर्थिंग चार्ज और अन्य प्रशासनिक शुल्कों में छूट देकर निजी शिपिंग कंपनियों को राहत प्रदान कर सकता है, जिससे वे यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ डालने से बच सकें। उन्होंने यह भी कहा कि फ्यूल की कीमतों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि के कारण निजी शिपिंग कंपनियों ने यह कदम उठाया है, लेकिन इसका पूरा भार यात्रियों और पर्यटन उद्योग पर डालना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि वह इन कंपनियों के साथ बातचीत कर उन्हें आंशिक सब्सिडी प्रदान करे, ताकि किराए में वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके। जॉन रॉबर्ट बाबू ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका असर केवल फेरी सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में कार्गो परिवहन, आवश्यक वस्तुओं और अन्य सेवाओं की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है, जिससे आम जनता पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि इस मुद्दे पर सभी हितधारकों, जिसमें निजी शिपिंग कंपनियां, ट्रैवल एजेंट्स और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं, के साथ एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और आम जनता को वास्तविक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के महत्वपूर्ण निर्णय अचानक लागू नहीं किए जाने चाहिए, बल्कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही लागू किए जाने चाहिए। अंत में जॉन रॉबर्ट बाबू ने कहा कि वर्तमान समय पर्यटन का मुख्य सीजन है और बड़ी संख्या में पर्यटक द्वीपों की यात्रा की योजना बना चुके हैं। ऐसे में किराए में अचानक वृद्धि से न केवल पर्यटकों को परेशानी होगी, बल्कि अंडमान के पर्यटन उद्योग को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान निकालने की अपील की।

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