प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव और गहराता जा रहा है। रविवार शाम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली रवाना होंगी, जहां 2 फरवरी को उनकी मुलाकात मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से होने वाली है। इस मुलाकात से ठीक पहले शनिवार को उन्होंने चुनाव आयोग पर नियम तोड़कर माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने का आरोप लगाते हुए सीईसी को एक और पत्र भेजा है। यह SIR प्रक्रिया को लेकर आयोग को भेजा गया उनका छठा पत्र है।
तीन पन्नों के इस पत्र में मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है, जो पूरी तरह जनविरोधी है। ममता बनर्जी ने लिखा कि उन्होंने पहले भी जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर आयोग का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन अब तक एक भी पत्र का जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में 1950 के रिप्रेज़ेंटेशन ऑफ द पीपल्स एक्ट और 1960 के रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स का हवाला देते हुए कहा कि SIR के तहत मतदाताओं के सत्यापन की जिम्मेदारी केवल ईआरओ (ERO) और एईआरओ (AERO) की है।
ऐसे में उनके काम की ‘निगरानी’ के लिए माइक्रो ऑब्ज़र्वर की नियुक्ति किस कानूनी प्रावधान के तहत की गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। ममता बनर्जी का आरोप है कि माइक्रो ऑब्ज़र्वर की भूमिका और अधिकार तय नहीं हैं और बिना किसी कानून में संशोधन के चुनाव आयोग को कोई नया पद सृजित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आयोग के बार-बार बदले जा रहे नियमों के कारण आम लोगों को लंबे समय तक परेशान होना पड़ रहा है। पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने मांग की कि जनहित में SIR की मौजूदा प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।