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‘श्रमिक विरोधी नीतियों’ के खिलाफ सीटू का सम्मेलन, केंद्र सरकार पर साधा निशाना

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स अंडमान एवं निकोबार राज्य समिति द्वारा आज 13 जून, 2026 को दोपहर के समय आंध्र एसोसिएशन हॉल, पोर्ट ब्लेयर (श्री विजयापुरम) में “मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियां” विषय पर एक ट्रेड यूनियन सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने भाग लेकर श्रमिकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सीटू के अखिल भारतीय सचिव सी.एच. नरसिंगा राव ने कहा कि वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से केंद्र सरकार कथित तौर पर लगातार श्रमिक विरोधी नीतियों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण की अपनी प्रतिबद्ध नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के समुद्री बंदरगाहों और हवाई अड्डों को एक-एक कर निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में पिछले 15 वर्षों से श्रमिकों के वेतन में संशोधन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि लगातार शोषण से परेशान होकर हजारों श्रमिक न्यूनतम वेतन बढ़ाने तथा अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए। नरसिंगा राव ने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में सीटू नेतृत्व और श्रमिकों द्वारा लगातार संघर्ष के माध्यम से वेतन के 1/30वें हिस्से के साथ महंगाई भत्ते का लाभ हासिल करने की उपलब्धि की सराहना भी की। सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीटू की अखिल भारतीय सचिव दीपा के. राजेन ने कहा कि देश में सांप्रदायिक दक्षिणपंथी ताकतें लगातार मजबूत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों और राज्यों में श्रमिकों को न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जा रहा है तथा श्रमिकों के शोषण के खिलाफ संघर्ष करने वाला संगठन सीटू ही है। उन्होंने कहा कि जहां देश के कई राज्य सरकारें श्रमिकों के शोषण पर मौन हैं या उसका समर्थन कर रही हैं, वहीं केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार के समर्थन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के श्रमिकों को न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में बिजली क्षेत्र का निजीकरण किया जा रहा है, जिससे बिजली शुल्क में भारी वृद्धि होगी और इसका सबसे अधिक असर गरीब तथा सामान्य जनता पर पड़ेगा। सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीटू अंडमान एवं निकोबार राज्य समिति के महासचिव बी. चंद्रचूड़न ने द्वीपसमूह में सीटू के बैनर तले श्रमिकों द्वारा किए गए विभिन्न संघर्षों की जानकारी दी। राज्य समिति के उपाध्यक्ष डी. अय्यप्पन ने पिछले 12 वर्षों के दौरान मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कथित तौर पर विभिन्न श्रमिक विरोधी कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। राज्य समिति के सचिव एस.पी. कलैराजन ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता राज्य समिति के अध्यक्ष आर. सुरेंद्रन पिल्लै ने की। सम्मेलन में नगर क्षेत्र और दक्षिण अंडमान के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने श्रमिक एकता को मजबूत करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया।


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