हर राज्य में जल संसाधन संरक्षण की चुनौती अलग -अलग 
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तालाबों से बदलती जल तस्वीर: तीन राज्यों में बढ़े जल निकाय, पांच राज्यों में घटे

भारत के जल संसाधन एक समान नहीं हैं, हर राज्य में संरक्षण की चुनौती भी ले रही अलग रूप

Lokendra Bahuguna

नयी दिल्ली : भारत की जल तस्वीर में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। जल निकायों की दूसरी गणना में महाराष्ट्र ने चौंकाने वाली बढ़त दर्ज की है। राज्य में अब 4.74 लाख जल निकाय दर्ज किये गये हैं, जो पहली गणना में दर्ज संख्या के मुकाबले करीब पांच गुना हैं। दूसरी ओर, देश के पांच राज्यों—मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और राजस्थान—में जल निकायों की संख्या में कमी सामने आयी है।

आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर

आंकड़े केवल जल संरचनाओं की संख्या में बदलाव नहीं बताते, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पानी के संरक्षण, उपयोग और स्थानीय जल संसाधनों की स्थिति में हो रहे बदलाव की तस्वीर भी पेश करते हैं। जल निकायों की दूसरी गणना इस व्यापक तस्वीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामने रखती है कि भारत के जल संसाधन एक समान नहीं हैं, और उनके संरक्षण की चुनौती भी हर राज्य में अलग रूप ले रही है।

जल शक्तिमंत्री ने जारी की रिपोर्ट

जल निकायों की दूसरी गणना के खंड-2, भाग-2 में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ तथा जम्मू-कश्मीर को शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने 25 सितंबर को नयी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित नौवें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह के समापन समारोह में जारी की थी।

महाराष्ट्र में लगभग चार गुना बढ़ोतरी

दूसरी गणना में महाराष्ट्र में कुल 4,74,548 जल निकाय दर्ज किए गये। पहली गणना, जो 2017-18 में हुई थी, में यह संख्या 97,062 थी। इस तरह राज्य में जल निकायों की संख्या में 388.91 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। महाराष्ट्र के जल संसाधनों की एक खास विशेषता यह है कि इनका बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में है। राज्य में दर्ज कुल जल निकायों में 99.72 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें तालाबों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है—कुल जल निकायों में 61.68 प्रतिशत तालाब हैं। इन जल निकायों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कृषि जरूरतों के लिए होता है। महाराष्ट्र में उपयोग में आने वाले जल निकायों में से 98.06 प्रतिशत का प्रमुख उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। यानी राज्य की जल संरचनाएं केवल पानी जमा करने के साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण आधार हैं।

उत्तर प्रदेश में भी बढ़ी संख्या

देश के दूसरे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी जल निकायों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गयी है। दूसरी गणना में राज्य में 2,86,292 जल निकाय पाये गये, जबकि पहली गणना में इनकी संख्या 2,45,087 थी। इस तरह उत्तर प्रदेश में जल निकायों की संख्या में 16.81 प्रतिशत की वृद्धि हुई। महाराष्ट्र के मुकाबले यह वृद्धि दर काफी कम है, लेकिन कुल संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख जल निकाय वाले राज्यों में बना हुआ है।

हर राज्य की कहानी एक जैसी नहीं

जहां महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जल निकायों की संख्या बढ़ी है, वहीं पांच राज्यों की तस्वीर इसके उलट है। मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और राजस्थान में पहली गणना की तुलना में जल निकायों की संख्या घट गयी।

मिजोरम में 63%, अरुणाचल में 50 प्रतिशत की गिरावट

इनमें सबसे बड़ी गिरावट मिजोरम में 63 प्रतिशत दर्ज हुई। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में 50 प्रतिशत की कमी आई। यह गिरावट विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि जल निकायों की संख्या में कमी स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता, जल संरचनाओं के संरक्षण और उनके उपयोग से जुड़े सवालों को सामने लाती है। हालांकि केवल संख्या में कमी या बढ़ोतरी के आधार पर किसी राज्य में जल संसाधनों की पूरी स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। जल निकायों का आकार, उनकी स्थिति, उनमें उपलब्ध पानी, उपयोगिता और पुनर्भरण जैसे पहलू भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

कब हुई गणना?

देश में जल निकायों की पहली गणना 2017-18 में की गयी थी। इसके बाद दूसरी गणना 3 अप्रैल 2025 को शुरू हुई। इस गणना के लिए 2023-24 को आधार वर्ष माना गया। दूसरी गणना में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ-साथ चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर को शामिल किया गया।

जल की कहानी आंकड़ों से आगे

जल निकायों की गणना मूल रूप से देश में उपलब्ध स्थानीय जल संसाधनों की पहचान और उनकी स्थिति समझने की कोशिश है। तालाब, झील, जलाशय और अन्य जल संरचनाएं कई क्षेत्रों में पीने के पानी, सिंचाई, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

जल संसाधनों की तस्वीर राज्यों के बीच काफी अलग-अलग

महाराष्ट्र में जल निकायों की संख्या में हुई बड़ी वृद्धि और पांच राज्यों में दर्ज गिरावट इस बात की ओर संकेत करती है कि भारत के जल संसाधनों की तस्वीर राज्यों के बीच काफी अलग-अलग है। कहीं पारंपरिक और स्थानीय जल संरचनाओं का विस्तार दिखाई देता है, तो कहीं उनकी संख्या कम हुई है। आने वाले वर्षों में इन आंकड़ों का महत्व इसलिए भी बढ़ेगा क्योंकि जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और बढ़ती कृषि एवं शहरी जरूरतों के बीच स्थानीय जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में केवल यह जानना पर्याप्त नहीं होगा कि किसी राज्य में कितने जल निकाय हैं; यह भी देखना होगा कि वे कितने सक्रिय हैं, उनका कितना हिस्सा उपयोग में है और उनमें पानी को बनाए रखने की क्षमता कितनी है।

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