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भूपेन हजारिका की जयंती पर अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने दी श्रद्धांजलि

ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने मंगलवार को प्रख्यात गायक, संगीतकार और सांस्कृतिक हस्ती भूपेन हजारिका की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने हजारिका को ऐसी ‘कालजयी आवाज’ बताया, जिसने पूर्वोत्तर भारत ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया के लोगों को भी अपनी संगीत साधना के जरिए जोड़ा। खांडू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि भूपेन हजारिका के गीत भौगोलिक सीमाओं से परे लोगों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते थे। उन्होंने कहा कि हजारिका के गीतों और धुनों की गूंज आज भी अरुणाचल प्रदेश में सुनाई देती है और वे लोगों में शांति, एकता और सांस्कृतिक गौरव की भावना जगाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारिका की कालजयी विरासत आने वाली पीढ़ियों को जोड़ने और प्रेरित करने का काम करती रहेगी।

‘ब्रह्मपुत्र के गायक’ को चौना मीन ने भी किया याद

अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री चौना मीन ने भी भूपेन हजारिका को श्रद्धांजलि देते हुए उनके प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘बर्ड ऑफ ब्रह्मपुत्र’ की रचनाएं आज भी प्रेरणा का चिरस्थायी स्रोत हैं। मीन ने कहा कि अपने गीतों, शब्दों और दृष्टिकोण के माध्यम से हजारिका ने पूर्वोत्तर के लोगों, उनकी नदियों, संघर्षों और भावनाओं को आवाज दी। उन्होंने ऐसी सांस्कृतिक विरासत छोड़ी, जो आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करती रहेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारिका का योगदान केवल संगीत और कला तक सीमित नहीं था। उनका काम विभिन्न संस्कृतियों और संपूर्ण मानवता को जोड़ने वाले एक सांस्कृतिक पुल की तरह था।

8 सितंबर 1926 को हुआ था जन्म

भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के सदिया में हुआ था। उन्होंने असमिया संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गायक और संगीतकार के साथ-साथ वे गीतकार, कवि, फिल्मकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी थे। उन्हें व्यापक रूप से ‘बर्ड ऑफ ब्रह्मपुत्र’ के नाम से जाना जाता है। हजारिका का निधन 5 नवंबर 2011 को मुंबई में हुआ था। उनके निधन के बाद भी उनकी रचनाएं सामाजिक सद्भाव, मानवीय संवेदना और एकता के संदेश के लिए याद की जाती रही हैं।

2019 में मिला भारत रत्न

भूपेन हजारिका को मरणोपरांत 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत सरकार ने जनवरी 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुने जाने की घोषणा की थी। हजारिका की संगीत यात्रा ने असम और पूरे पूर्वोत्तर की लोक-सांस्कृतिक परंपराओं को देश के व्यापक सांस्कृतिक परिदृश्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके गीत आज भी पूर्वोत्तर की पहचान, मानवीय एकता और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक माने जाते हैं।

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