गुवाहाटी : महान गायक, संगीतकार, गीतकार और फिल्मकार भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी आवाज ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाने का काम किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अपने संगीत के जरिए हजारिका ने अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्ति दी तथा उनके गीतों ने लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर डॉ. हजारिका को याद करते हुए कहा कि उनकी आवाज में असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना की गूंज थी। उन्होंने कहा कि संगीत के माध्यम से हजारिका ने देश के असंख्य लोगों के विचारों और भावनाओं को खूबसूरती से स्वर दिया। मोदी ने कहा कि भूपेन दा का जीवन और उनका कार्य आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने पिछले वर्ष गुवाहाटी में आयोजित भूपेन हजारिका की जन्मशती समारोह की शुरुआत में शामिल होने की अपनी स्मृतियों को भी साझा किया।
संगीत के जरिए दिलों को जोड़ा
डॉ. भूपेन हजारिका की सबसे बड़ी विशेषताओं में उनकी संगीत साधना के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को स्वर देना शामिल था। उनके गीतों में असम की लोक संस्कृति, ब्रह्मपुत्र, प्रकृति, सामाजिक सरोकार, मानवीय समानता और भाईचारे की भावना प्रमुखता से दिखाई देती है। उनका संगीत केवल असमिया समाज तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने असमिया के साथ हिंदी, बंगाली और अन्य भाषाओं में भी अपनी रचनात्मक पहचान बनाई। उनकी आवाज और रचनाओं ने पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विरासत को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी व्यापक सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि हजारिका के गीतों ने लोगों को करीब लाने का काम किया।
‘सुधाकंठ’ के नाम से लोकप्रिय थे हजारिका
भूपेन हजारिका को उनके प्रशंसक प्यार से ‘सुधाकंठ’ यानी अमृत जैसी आवाज वाले गायक के रूप में याद करते हैं। 8 सितंबर 1926 को असम में जन्मे हजारिका ने संगीत, गायन, गीत लेखन, कविता और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। उनका निधन 5 नवंबर 2011 को हुआ था। उनकी 100वीं जयंती के अवसर पर पूरे देश में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना और सामाजिक न्याय का संदेश भी प्रमुख रहा। उनकी कला ने असमिया संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ भारतीय संगीत को भी समृद्ध किया। डॉ. भूपेन हजारिका को उनके असाधारण योगदान के लिए मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। केंद्र सरकार ने जनवरी 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की थी। अगस्त 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किया। भारत रत्न मिलने के साथ उनकी राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत में भूमिका को आधिकारिक तौर पर भी सर्वोच्च सम्मान मिला।
पिछले साल गुवाहाटी से शुरू हुआ था जन्मशती समारोह
भूपेन हजारिका की जन्मशती के वर्षभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत पिछले साल गुवाहाटी में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने उस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को इसी कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष गुवाहाटी में जन्मशती समारोह के दौरान भी हजारिका की संगीत विरासत को भारत की सांस्कृतिक एकता से जोड़ते हुए कहा था कि उनकी रचनाओं ने पीढ़ियों को प्रभावित किया और देश को जोड़ने का काम किया।
हिमंत शर्मा ने मोदी का जताया आभार
प्रधानमंत्री के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से ब्रह्मपुत्र के कवि को उनकी जन्मशती पर दी गई श्रद्धांजलि उचित सम्मान है। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले साल सितंबर में भूपेन हजारिका की जन्मशती के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की थी। उनके अनुसार, इन समारोहों ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के असाधारण जीवन और कालजयी विरासत को देशभर में याद करने और सम्मानित करने का अवसर दिया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत मार्गदर्शन और समारोहों में उनकी भागीदारी के लिए आभार जताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस वर्ष के अंत में नई दिल्ली में होने वाले जन्मशती समारोह के समापन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।
29 नवंबर को दिल्ली में होगा समापन समारोह
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को बताया कि भूपेन हजारिका जन्मशती समारोह का अंतिम कार्यक्रम 29 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल होंगे। शर्मा ने कहा कि असम में जन्मशती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और राज्य सरकार ने इसके लिए व्यापक तैयारियां की हैं। उन्होंने कहा कि जन्मशती समारोहों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भूपेन हजारिका की रचनाओं और उनके व्यापक सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना भी है। भूपेन हजारिका की विरासत केवल एक महान गायक या संगीतकार की विरासत नहीं है। वह असम की सांस्कृतिक पहचान और पूर्वोत्तर की आवाज के रूप में भी स्थापित हैं। उनकी रचनाओं ने क्षेत्रीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के बीच एक मजबूत सेतु बनाया। प्रधानमंत्री का जन्मशती पर संदेश इसी विरासत को रेखांकित करता है कि भूपेन हजारिका की आवाज ने असम और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक भावनाओं को देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचाया। उनकी आवाज भले ही अब भौतिक रूप से मौन है, लेकिन उनके गीत आज भी भारतीय संगीत और सांस्कृतिक चेतना में जीवंत हैं।