समाचार 2 फोटो कैप्शन: धनिकारी बांध का दृश्य।  
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बारिश में 21 प्रतिशत कमी के बीच अंडमान प्रशासन ने जल संरक्षण की अपील की

निवासियों से रोजमर्रा के इस्तेमाल में पानी बचाने का आग्रह

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने कम बारिश के बीच आम जनता से पानी का इस्तेमाल सोच-समझकर करने और रोजमर्रा के कामों में जल संरक्षण को अपनाने की अपील की है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा मानसून अवधि में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में करीब 21 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। मई से सितंबर के बीच धनिकारी क्षेत्र में सामान्य रूप से 4618 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस अवधि में अब तक केवल 1647 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

कम बारिश का असर जलाशयों और पेयजल स्रोतों के पुनर्भरण पर भी पड़ा है। इसका प्रभाव खास तौर पर श्री विजय पुरम नगर पालिका परिषद क्षेत्र में देखा जा रहा है। फिलहाल धनिकारी बांध में पानी का भंडारण करीब 2400 मिलियन लीटर (एमएल) है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 7532 एमएल पानी उपलब्ध था। आंकड़ों से साफ है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार जल भंडारण काफी कम है।

प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पेयजल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पानी सीमित संसाधन है और इसे बचाने में केवल प्रशासन ही नहीं, बल्कि परिवारों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी भूमिका है। रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव कर काफी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है।

प्रशासन ने लोगों से कहा है कि जरूरत न होने पर नल खुला न छोड़ें। दांत साफ करते समय, बर्तन धोते समय और घर के दूसरे कामों के दौरान बहते पानी का इस्तेमाल कम किया जाए। घरों में नल, पाइप, ओवरहेड टैंक और अन्य प्लंबिंग उपकरणों से पानी टपक रहा हो तो उसकी मरम्मत तुरंत कराई जाए, ताकि पानी बेवजह बर्बाद न हो।

ओवरहेड टंकियों को भरने के बाद पानी बहते रहने से भी बचने की सलाह दी गई है। जहां संभव हो, वहां ऑटोमैटिक कट-ऑफ या फ्लोट वाल्व लगाए जा सकते हैं। वाहनों और घर के बाहर के हिस्सों की सफाई के लिए लगातार पाइप चलाने के बजाय बाल्टी का इस्तेमाल करने को कहा गया है। आंगन, ड्राइववे और खुले स्थानों को बिना जरूरत पीने योग्य पानी से धोने से भी बचने की अपील की गई है।

प्रशासन ने घरों में इस्तेमाल होने वाले पानी को दोबारा उपयोग में लाने का सुझाव भी दिया है। सब्जियां धोने या ऐसे अन्य घरेलू कामों से बचा पानी, जहां उपयुक्त हो, बागवानी और सफाई के काम में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह जहां संभव हो, वर्षा जल का संग्रह और भंडारण किया जाना चाहिए। इस पानी को गैर-पेयजल जरूरतों में इस्तेमाल करने से पेयजल स्रोतों पर दबाव कम किया जा सकता है।

होटल, संस्थान, कार्यालय, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और हाउसिंग सोसायटियों से भी अपने परिसर की जल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित जांच करने और लीकेज मिलने पर उसे तुरंत ठीक कराने को कहा गया है। इन प्रतिष्ठानों से जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई है। सार्वजनिक जल आपूर्ति नेटवर्क में लीकेज या पानी की बर्बादी दिखाई देने पर इसकी सूचना संबंधित एपीडब्ल्यूडी अधिकारियों को 03192-251185 या 18003451666 पर दी जा सकती है। श्री विजय पुरम नगर पालिका परिषद को 03192-231179 पर सूचना दी जा सकती है।

प्रशासन की ओर से जल स्रोत बढ़ाने, भंडारण क्षमता बेहतर करने और वितरण के दौरान पानी के नुकसान को कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों के साथ लोगों द्वारा पानी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी है, ताकि उपलब्ध संसाधनों पर दबाव कम किया जा सके और आने वाले समय में पेयजल की स्थिति संभाली जा सके।

प्रशासन ने द्वीपवासियों से जल संरक्षण को केवल पानी की कमी के समय की जाने वाली कवायद तक सीमित नहीं रखने की अपील की है। लोगों से इसे रोजमर्रा की आदत बनाने का आग्रह किया गया है। प्रशासन का कहना है कि आज बचाया गया पानी भविष्य में समुदाय की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।

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