ढाका, 3 अगस्त (पीटीआई): बांग्लादेश ने अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नई दिल्ली से प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक संबोधन को लेकर भारत से उसका रुख स्पष्ट करने को कहा है। बांग्लादेश का कहना है कि यदि भारतीय भूमि का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया गया, तो इसका दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने सोमवार को मीडिया से कहा कि बांग्लादेश नहीं चाहता कि यह मुद्दा दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित करे। उन्होंने कहा कि भारत में रह रहे ऐसे "फरार व्यक्तियों" की राजनीतिक गतिविधियां, जो बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं, द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 78 वर्षीय शेख हसीना 5 अगस्त को नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसी साउथ एशिया) द्वारा आयोजित एक निजी कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से शामिल हो सकती हैं। इस कार्यक्रम में उनके अमेरिका में रह रहे बेटे सजीब वाजेद जॉय, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नोफेल और बांग्लादेश ह्यूमन राइट्स वॉच के महासचिव मोहम्मद अली सिद्दीक के भी शामिल होने की संभावना है।
शमा ने कहा, "बांग्लादेश चाहता है कि भारत इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। हम चाहते हैं कि भारत के साथ हमारे संबंध बेहतर हों और हमें विश्वास है कि भारत भी यही चाहता है।"
इस बीच, प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भी कहा कि भारतीय भूमि से शेख हसीना का संभावित सार्वजनिक संबोधन दोनों देशों के बीच बन रहे सकारात्मक माहौल को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने यह बात सोमवार को भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात के दौरान कही। दोनों नेताओं के बीच भारत-बांग्लादेश संबंधों और आपसी हितों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारत के उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि बैठक में दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर जन-केंद्रित सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत ने बांग्लादेश की जनता की विकास संबंधी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाउद्दीन अहमद ने कहा कि 5 अगस्त से पहले पूरे देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी और वह भारत चली आई थीं। इसके बाद अंतरिम सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्यकारी आदेश जारी कर उनकी पार्टी अवामी लीग को भंग कर दिया था।
नवंबर 2025 में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक कार्रवाई से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में शेख हसीना को अनुपस्थिति में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। हसीना ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
बांग्लादेश लंबे समय से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है।