सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और मुख्यभूमि के शहरों के बीच हवाई किरायों में हुई तेज बढ़ोतरी के खिलाफ गुरुवार को बड़ी संख्या में द्वीपवासी, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक, व्यापारिक प्रतिनिधि और नागरिक समाज के सदस्य वीर सावरकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के समीप एकत्र हुए और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए विशाल प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था और इसका नेतृत्व वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं व्यवसायी टीएसजी भास्कर ने किया। प्रदर्शनकारी सुबह डेयरी फार्म जंक्शन पर एकत्र हुए और इसके बाद हाथों में तख्तियां लेकर तथा हवाई किरायों को नियंत्रित करने और बेहतर हवाई संपर्क की मांग से जुड़े नारे लगाते हुए एयरपोर्ट के आगमन द्वार की ओर मार्च किया।
प्रदर्शनकारियों ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और एयरलाइन कंपनियों की आलोचना करते हुए कहा कि टिकटों की कीमतें “आसमान छूने वाली” हो गई हैं और इसका असर केवल आम द्वीपवासियों पर ही नहीं, बल्कि द्वीप समूह की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान भास्कर ने मुख्यभूमि से जुड़े विभिन्न हवाई मार्गों पर टिकटों के किराए में हुई भारी बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दिल्ली और चेन्नई जैसे शहरों से द्वीप समूह को जोड़ने वाले मार्गों पर एकतरफा हवाई किराया कई मौकों पर 20 हजार रुपये से लेकर 35 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हवाई मार्ग से मुख्यभूमि ले जाने की लागत को लेकर भी चिंता जताई गई। प्रदर्शन के दौरान साझा की गई जानकारी के अनुसार, स्ट्रेचर सुविधा के साथ आपातकालीन चिकित्सा परिवहन का खर्च लगभग 4.5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे मरीजों के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
टीएसजी भास्कर ने हवाई किरायों को नियंत्रित करने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था बनाने और द्वीप समूह से आने-जाने के लिए आवश्यक हवाई संपर्क को ध्यान में रखते हुए उचित तथा व्यावहारिक किराया संरचना लागू करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान उठाई गई प्रमुख मांगों में से एक प्रति किलोमीटर निर्धारित नियंत्रित दर के आधार पर हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय करने की थी।
उन्होने कहा कि द्वीप समूह से आने-जाने वाली हवाई सेवा को एक आवश्यक सुविधा के रूप में देखा जाना चाहिए और हवाई किरायों को ऐसे स्तर तक नहीं बढ़ने देना चाहिए जहां सामान्य द्वीपवासियों के लिए यात्रा करना आर्थिक रूप से असंभव हो जाए।
उन्होंने रूट डिस्पर्सल गाइडलाइंस यानी आरडीजी की समीक्षा की भी मांग की और द्वीपीय मार्गों पर सेवाएं संचालित करने वाली एयरलाइनों के लिए अधिक मजबूत हवाई संपर्क दायित्व निर्धारित करने की आवश्यकता जताई।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संचालकों ने कहा कि ऊंचे हवाई किरायों का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक और श्रृंखलाबद्ध प्रभाव पड़ रहा है। होटल संचालक, ट्रैवल एजेंट, स्कूबा डाइविंग संचालक, नाव संचालक, परिवहन सेवा प्रदाता और छोटे व्यवसाय काफी हद तक पर्यटकों के आगमन पर निर्भर हैं।
टीएसजी भास्कर ने कहा कि जब अंडमान आने की यात्रा लागत अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों की यात्रा के बराबर या उससे भी अधिक हो जाती है, तब पर्यटक थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे विदेशी पर्यटन स्थलों को चुन सकते हैं।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पर्यटकों की संख्या को लेकर सामने आने वाले आधिकारिक आंकड़े क्या वास्तव में कम होती उड़ानों की संख्या और अत्यधिक टिकट कीमतों के कारण जमीनी स्तर पर पर्यटन क्षेत्र पर पड़ रहे प्रभाव को सही तरीके से दर्शाते हैं।
मुख्य सचिव से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल टूर ऑपरेटरों के प्रतिनिधि ने बताया कि यह मुद्दा प्रशासन के साथ विस्तार से उठाया गया।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मुख्य सचिव ने बताया कि प्रशासन और उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से हवाई किरायों और हवाई संपर्क से जुड़ा मामला पहले ही दिल्ली स्थित संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक परिणाम सामने नहीं आया है।
मुख्य सचिव ने कथित तौर पर यह भी स्पष्ट किया कि अकासा, इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस निजी कंपनियां हैं और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन सीधे तौर पर उन्हें अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
प्रशासन ने इस मामले को आगे संबंधित स्तर पर उठाने के लिए लगभग एक सप्ताह का समय मांगा है। प्रदर्शनकारियों के साथ साझा की गई बैठक की जानकारी के अनुसार, यदि इसके बाद भी कोई सकारात्मक प्रगति नहीं होती है तो लगभग पांच से दस प्रतिनिधियों का एक दल दिल्ली जाकर संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात कर सकता है।
स्थानीय निवासियों के लिए रियायती हवाई टिकट उपलब्ध कराने का मुद्दा भी बैठक के दौरान चर्चा में आया।
बैठक के बाद साझा की गई जानकारी के अनुसार, मुख्य सचिव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि द्वीपवासियों को रियायती हवाई किराया उपलब्ध कराने की संभावना का अध्ययन करने के लिए एक समिति गठित की जाएगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर विचार, आवश्यक जांच और स्वीकृतियों की प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम एक से दो महीने का समय लगने की संभावना जताई गई है।
आयोजकों ने गुरुवार के प्रदर्शन को संबंधित अधिकारियों के लिए एक चेतावनी करार देते हुए पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों, व्यापारिक संगठनों, नागरिक समाज समूहों और चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित समाज के सभी वर्गों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान हवाई किराया संकट अब केवल पर्यटन उद्योग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह आम द्वीपवासियों, मरीजों, छात्रों, व्यवसायियों और व्यापक द्वीपीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर मुद्दा बन चुका है।
टीएसजी भास्कर ने केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय से पर्याप्त संख्या में उड़ान सेवाएं बहाल करने तथा हवाई किरायों में अनुचित और अत्यधिक बढ़ोतरी को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
हितधारकों ने कहा कि द्वीप समूह की हवाई संपर्क और हवाई किरायों से जुड़ी समस्या का दीर्घकालिक समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष लगातार सामूहिक प्रतिनिधित्व और दबाव बनाए रखना आवश्यक होगा।