स्ट्रेट ऑफ होर्मुज  
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होर्मुज में ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हमला, एक की मौत

जहाज को हुए नुकसान और चालक दल की स्थिति की जानकारी नहीं मिल सकी

Bharat Paswan

तेहरान : रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक वाणिज्यिक जहाज पर रविवार को अज्ञात प्रक्षेप्य से हमला किया गया। ब्रिटेन की नौसेना से संबद्ध समुद्री सुरक्षा एजेंसी यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने इसकी जानकारी दी। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, क़ेश्म द्वीप के पास एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हुए। यूकेएमटीओ ने बताया कि उसे जलमार्ग से गुजर रहे जहाज पर प्रक्षेप्य लगने की सूचना मिली थी। शुरुआती रिपोर्ट में प्रक्षेप्य के प्रकार, जहाज को हुए नुकसान और चालक दल की स्थिति की जानकारी नहीं मिल सकी थी। अमेरिकी सेना की ओर से भी तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है। संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया की करीब पांचवीं तेल आपूर्ति इसी जलमार्ग से गुजरती थी। इससे पहले शनिवार को ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। सऊदी अरब और इराक के अनुसार, पाइपलाइन पर हमला करने वाले ड्रोन इराकी क्षेत्र से आए थे, जहां ईरान समर्थित सशस्त्र समूह सक्रिय हैं। करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए महत्वपूर्ण वैकल्पिक तेल निर्यात मार्ग है। हमले से पहले पाइपलाइन से रोजाना 40 से 50 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांच प्रतिशत है।

बैठक में होर्मुज को लेकर समझौते की संभावना नहीं

इस बीच, ईरान और खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर ओमान में वार्ता की तैयारी है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के अनुसार, बैठक में जलडमरूमध्य को लेकर किसी समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना नहीं है। बैठक में ईरान और ओमान के बीच जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मार्गों को लेकर एक समझौता पेश किया जाएगा। इसमें इराक भी शामिल होगा। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के सामने रखी सात शर्तें पूरी होने तक जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से इनकार किया है।

ईरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण को मान्यता दी जाए और वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार मिले। अमेरिका इस मांग को स्वीकार नहीं करता।

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