गुवाहाटी : असम के चाय बागान समुदायों के शैक्षिक, सामाजिक-आर्थिक और डिजिटल विकास को लेकर गुवाहाटी में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई। 5 से 7 अक्टूबर तक आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों, कौशल विकास विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने समुदायों के सशक्तीकरण के लिए शिक्षा, रोजगार और डिजिटल कौशल को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर चर्चा की। उद्घाटन सत्र में असम कौशल विकास मिशन (ASDM) के ACS एवं मिशन निदेशक हनीफ नूरानी और OKDISCD, गुवाहाटी की निदेशक शाश्वती चौधरी सम्मानित अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में ICSSR परियोजना की परियोजना समन्वयक काजी फिरदौसी इस्लाम, OKDISCD के एसोसिएट प्रोफेसर राजदीप सिंघा और ICSSR परियोजना की परियोजना निदेशक निवेदिता गोस्वामी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
यह कॉन्क्लेव ICSSR द्वारा प्रायोजित शोध परियोजना ‘डिजिटल और गैर-डिजिटल कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से असम की चाय जनजातियों का सशक्तीकरण’ से जुड़ा है। यह परियोजना जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली के शैक्षिक अध्ययन विभाग को सौंपी गई है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि डिजिटल साक्षरता, कौशल प्रशिक्षण, शिक्षा और आजीविका आधारित पहल चाय बागान समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में किस तरह योगदान दे सकती हैं। पहले दिन के सत्रों में कौशल विकास, शिक्षा, डिजिटल साक्षरता, रोजगार क्षमता, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच और आजीविका के वैकल्पिक साधनों जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि समुदायों के दीर्घकालिक सशक्तीकरण के लिए पारंपरिक कल्याणकारी उपायों के साथ आधुनिक शिक्षा और बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।
डिजिटल सेवाओं और करियर काउंसलिंग पर चर्चा
चर्चा में डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, करियर काउंसलिंग और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने को भी महत्वपूर्ण बताया गया। प्रतिभागियों के अनुसार, तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल चाय बागान समुदायों के युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खोल सकता है। कार्यक्रम में कौशल किशोर, अहरार हुसैन, समीर बाबू एम., जेबा तबस्सुम, ASDM की स्किल प्रोजेक्ट मैनेजर पिंकू चौधरी, IIT गुवाहाटी के धीरज सिंघा, कानोई कॉमर्स कॉलेज डिब्रूगढ़ के केशवानंद हलोई और शिक्षाविद एवं करियर काउंसलर ज्योतिर्मय हजारिका सहित कई विद्वानों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
रिसर्च और नीति के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
कॉन्क्लेव में शोध से सामने आने वाले निष्कर्षों और सरकारी नीतियों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि विकास योजनाओं को चाय बागान समुदायों की वास्तविक जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले संगठनों के बीच नियमित संवाद जरूरी है। आयोजकों के अनुसार, इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव से ऐसे व्यावहारिक सुझाव सामने आने की उम्मीद है, जो असम के चाय बागान समुदायों के शैक्षिक, डिजिटल, कौशल आधारित और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में मदद करेंगे। साथ ही जामिया मिलिया इस्लामिया, ASDM, OKDISCD, IIT गुवाहाटी और अन्य संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।