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ओएनजीसी पाइपलाइन से तेल चोरी मामले में सह-जिला पुलिस अधीक्षक गिरफ्तार

गोलाघाट में 3 अगस्त को हुई चोरी की घटना जांच के दौरान सामने आए भौतिक साक्ष्यों के आधार पर हुई कार्रवाई

गोलाघाट : असम के गोलाघाट जिले में ओएनजीसी की पाइपलाइन से कच्चे तेल की चोरी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरूपथार के सह-जिला पुलिस अधीक्षक (सीडीएसपी) दीपेन पातर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, पातर पर तीन अगस्त को सरूपथार थाना क्षेत्र के श्याम गांव में हुई कच्चे तेल की चोरी में कथित रूप से शामिल होने का आरोप है। गोलाघाट के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वप्ननील डेका ने बृहस्पतिवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि तेल चोरी के इस मामले की जांच के दौरान सामने आए भौतिक साक्ष्यों के आधार पर सीडीएसपी दीपेन पातर को गिरफ्तार किया गया।

29 अगस्त को भी हुई थी गिरफ्तारियां

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में इससे पहले 29 अगस्त को कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उन आरोपियों से पूछताछ और मामले की आगे की जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे पुलिस अधिकारी की इस घटना में भूमिका की जांच का रास्ता खुला। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पाइपलाइन से कच्चे तेल की चोरी की योजना कैसे बनाई गई और इसमें कितने लोग शामिल थे। पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

3 अगस्त को सामने आया था तेल चोरी का मामला

पुलिस के अनुसार, तीन अगस्त को सरूपथार थाना क्षेत्र के श्याम गांव में ओएनजीसी की पाइपलाइन से कच्चा तेल चोरी किए जाने की घटना सामने आई थी। आरोप है कि पाइपलाइन में छेद कर उससे कच्चा तेल निकालने का प्रयास किया गया था। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू की। इसके बाद संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच की गई। इसी क्रम में 29 अगस्त को कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 

पाइपलाइन की सुरक्षा पर भी सवाल

ओएनजीसी की पाइपलाइनों से कच्चे तेल की चोरी तेल उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती है। ऐसी घटनाओं में पाइपलाइन में अवैध तरीके से छेद कर तेल निकालने का प्रयास किया जाता है, जिससे न केवल तेल की चोरी होती है बल्कि आग, रिसाव और पर्यावरणीय नुकसान का खतरा भी पैदा होता है। ओएनजीसी ने तेल पाइपलाइनों के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त की व्यवस्था मजबूत करने की बात पहले भी कही है। संसद की एक समिति के दस्तावेज में भी पाइपलाइन के संवेदनशील हिस्सों की पहचान, लाइन-वॉकर व्यवस्था और पुलिस के साथ संयुक्त गश्त का उल्लेख किया गया है। 

पुलिस अधिकारी की भूमिका की जांच

दीपेन पातर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले में उनकी कथित भूमिका, अन्य आरोपियों के साथ उनके संपर्क और तेल चोरी की पूरी साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। पुलिस ने फिलहाल गिरफ्तारी का आधार जांच के दौरान सामने आए भौतिक साक्ष्यों को बताया है। हालांकि, अधिकारी पर लगे आरोपों की पुष्टि अभी अदालत में होनी बाकी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि तेल चोरी की घटना में उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी और उनके साथ इस मामले में और कौन-कौन लोग जुड़े थे। 

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