वन बल मजबूत करने का संकल्प
गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के अवसर पर जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वनकर्मियों और अन्य लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वन बल को मजबूत करने और वन संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रीय वन शहीद दिवस पर वह उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने असम के जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। शर्मा ने कहा, “वन बल को मजबूत करने से लेकर ‘वन दुर्गाओं’ के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने तक असम उनके साहस को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने जंगलों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
‘वन दुर्गाओं’ के साहस को किया सलाम
मुख्यमंत्री ने वन सुरक्षा के मोर्चे पर तैनात महिला वनकर्मियों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा कीं। उन्होंने इन महिला कर्मियों को ‘वन दुर्गा’ बताते हुए वन एवं वन्यजीव संरक्षण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। असम प्राकृतिक संपदा और जैव विविधता की दृष्टि से देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। राज्य में काजीरंगा, मानस, नामेरी और ओरांग जैसे राष्ट्रीय उद्यान तथा कई वन्यजीव अभयारण्य हैं। इन क्षेत्रों में वनकर्मी वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध शिकार पर रोक और जंगलों के संरक्षण के लिए लगातार काम करते हैं।
वन सुरक्षा में बलिदान देने वालों का सम्मान
भारत में हर साल 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिवस जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले वन रक्षकों, वन रेंजरों, अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के सदस्यों के सम्मान में मनाया जाता है। यह दिन वन संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्य निभाने वाले लोगों के योगदान को याद करने का अवसर भी है। वन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अवैध शिकार, तस्करी, जंगल की आग और अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री शर्मा का संदेश ऐसे समय में आया है जब असम में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी चुनौतियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। उन्होंने वन बल को मजबूत करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वन शहीदों के साहस और बलिदान से प्रेरणा लेकर आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखा जाएगा।