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संस्कृत दिवस पर CM शर्मा ने याद की कामरूप की विद्वत परंपरा

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने संस्कृत दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं और प्राचीन कामरूप की समृद्ध संस्कृत परंपरा तथा ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में उसके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में कामरूप संस्कृत के अध्ययन, अध्यापन और ज्ञान की खोज का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को संस्कृत दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि प्राचीन कामरूप की संस्कृत विद्वता और ज्ञान परंपरा का प्रमाण आज भी विभिन्न शिलालेखों और ताम्रपत्रों में मिलता है। उन्होंने कहा कि यह विरासत असम के सांस्कृतिक और बौद्धिक इतिहास की महत्वपूर्ण पहचान है।

आनंदाराम बरुआ के योगदान को किया याद

मुख्यमंत्री ने संस्कृत के प्रख्यात विद्वान महामहोपाध्याय आनंदाराम बरुआ के योगदान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बरुआ ने संस्कृत भाषा और उसके साहित्य के अध्ययन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शर्मा ने कहा कि संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोश और संस्कृत व्याकरण के क्षेत्र में आनंदाराम बरुआ के महत्वपूर्ण कार्यों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यापक अकादमिक जगत से जोड़ने में मदद की। उनके शोध और विद्वता ने संस्कृत के अध्ययन को देश की सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक समुदाय तक पहुंचाने में योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आनंदाराम बरुआ का जीवन ज्ञान, समर्पण और संस्कृत भाषा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उनकी उपलब्धियां असम के लिए गौरव का विषय हैं और नई पीढ़ी को उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।

युवाओं से विरासत को आगे बढ़ाने की अपील

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि युवा पीढ़ी प्राचीन कामरूप की ज्ञान परंपरा और आनंदाराम बरुआ के योगदान से प्रेरणा लेगी। उन्होंने कहा कि अपनी प्राचीन भाषाई, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को समझना और उसे आगे बढ़ाना आने वाली पीढ़ियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं है, बल्कि भारत की विशाल ज्ञान परंपरा, साहित्य, दर्शन और संस्कृति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी रही है। असम में संस्कृत अध्ययन की पुरानी परंपरा राज्य की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह अवसर लोगों, विशेषकर युवाओं में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि तथा सम्मान को और बढ़ाए।

प्राचीन कामरूप का संस्कृत से गहरा संबंध

ऐतिहासिक रूप से प्राचीन कामरूप वर्तमान असम और आसपास के क्षेत्रों में विकसित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं राजनीतिक क्षेत्र था। यहां मिले शिलालेखों और ताम्रपत्रों से संस्कृत के प्रशासनिक, धार्मिक और विद्वत उपयोग के प्रमाण मिलते हैं। इस विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कामरूप की समृद्ध संस्कृत परंपरा असम की प्राचीन बौद्धिक पहचान को दर्शाती है।

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