गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को वैष्णव संत और असमिया समाज के आध्यात्मिक-सांस्कृतिक मार्गदर्शक श्रीमंत शंकरदेव की 578वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि शंकरदेव की शिक्षाएं समृद्ध असम और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में लोगों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शंकरदेव को नमन करते हुए कहा कि उनके जन्मोत्सव का यह पावन अवसर असमिया समाज के लिए विशेष महत्व रखता है।
आदर्शों पर चलने का आह्वान
शर्मा ने कहा कि महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव असमिया समाज के मार्गदर्शक और पूजनीय गुरुजन हैं। उनकी शिक्षाएं समाज को निरंतर दिशा देती रहेंगी। मुख्यमंत्री ने लोगों से शंकरदेव के ज्ञान, भक्ति और करुणा के कालजयी आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों का पालन कर बेहतर और अधिक समृद्ध समाज के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।
जीवन में महत्वपूर्ण योगदान
श्रीमंत शंकरदेव का जन्म 1449 में मध्य असम के नगांव जिले के बोरदोवा थान में हुआ था। उन्हें असम में नव-वैष्णव आंदोलन के प्रमुख संत, धार्मिक सुधारक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भक्ति आंदोलन के माध्यम से सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा दिया। उनके विचारों और शिक्षाओं का असम के धार्मिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा। शंकरदेव की परंपरा से जुड़े सत्र और नामघर आज भी असम की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी रचनाओं और विचारों ने असमिया साहित्य, संगीत, नृत्य तथा नाट्य परंपरा को भी प्रभावित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शंकरदेव की शिक्षाओं और आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनके मूल्यों को सामाजिक जीवन में अपनाना सामूहिक जिम्मेदारी है।