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बघेल की सलाह पर असम BJP का पलटवार

छत्तीसगढ़ शासन पर उठाए सवाल

Krishna Das Parth

गुवाहाटी : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को कांग्रेस नेता और एआईसीसी महासचिव भूपेश बघेल की ओर से दी गई राजनीतिक सलाह पर असम भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने बघेल के उस बयान को ‘‘हास्यास्पद’’ करार दिया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री सरमा को असम में बाढ़ और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी थी। असम प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता ब्रोजेन महंत ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल पर पलटवार करते हुए कहा कि जिस नेता की पार्टी को 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवानी पड़ी, वह भाजपा को शासन-प्रशासन का पाठ पढ़ाने की स्थिति में नहीं है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार का किया जिक्र

महंत ने कहा कि वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, लेकिन 2023 के चुनाव में जनता ने उसे सत्ता से बाहर कर दिया और भाजपा की वापसी हुई। भाजपा प्रवक्ता ने इस चुनावी नतीजे को बघेल सरकार के कार्यकाल से जुड़े आरोपों और विवादों का परिणाम बताया। उन्होंने बघेल के कार्यकाल को ‘‘भ्रष्टाचार की विरासत’’ और कथित घोटालों से जोड़ते हुए कई मामलों का उल्लेख किया। इनमें कथित शराब घोटाला, कथित समानांतर आबकारी सिंडिकेट, महादेव सट्टेबाजी ऐप से जुड़ा मामला, कथित कोयला लेवी रैकेट तथा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के आरोप शामिल हैं। हालांकि, इन मामलों में लगाए गए आरोपों को उनके संदर्भ और संबंधित जांच/कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही देखा जाना चाहिए। भाजपा ने इन आरोपों को बघेल सरकार के शासन पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया।

‘लोकतंत्र-विरोधी’ आरोप पर आपातकाल का हवाला

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के भाजपा पर लगाए जा रहे ‘‘लोकतंत्र-विरोधी’’ आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि देश उस दौर को नहीं भूला है। महंत ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया और विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने विशेष रूप से असम के पूर्व मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा और नेता दुलाल बरुआ की गिरफ्तारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को भाजपा पर लोकतंत्र को लेकर आरोप लगाने से पहले अपने दल के इतिहास को भी याद करना चाहिए।

मूल निवासियों के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरा

असम के मूल निवासियों के अधिकारों और उनकी पहचान के मुद्दे पर भी भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। महंत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ‘‘वोट बैंक की राजनीति’’ के चलते असम में अवैध रूप से आए लोगों को राजनीतिक संरक्षण और विशेष प्राथमिकता देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को असम के मूल निवासियों के अधिकारों को लेकर ‘‘मगरमच्छ के आंसू’’ बहाने का नैतिक अधिकार नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि राज्य की जनता कांग्रेस की कथित वोट बैंक राजनीति को अच्छी तरह समझती है। हालांकि, अवैध प्रवासन और इससे जुड़े राजनीतिक आरोप असम में लंबे समय से संवेदनशील और विवादित मुद्दे रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस इस विषय पर एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगाते रहे हैं।

बघेल ने सरमा को दी थी राजनीतिक सलाह

इससे पहले भूपेश बघेल ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य में बाढ़, बढ़ती कीमतों और अन्य जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की सलाह दी थी। बघेल ने भाजपा पर कथित लोकतंत्र-विरोधी गतिविधियों को लेकर भी निशाना साधा था। भाजपा ने बघेल के बयान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उनके ही शासनकाल और 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का मुद्दा उठा दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रवक्ता प्रांजल कलिता और मीडिया पैनलिस्ट अमल नारायण पटोवारी भी मौजूद थे। दोनों पक्षों के बयानों से असम में आगामी राजनीतिक मुद्दों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती बयानबाजी एक बार फिर सामने आई है।

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