गुवाहाटी : नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद असम के 10 लोगों के अब भी लापता होने की सूचना है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने शनिवार को जारी अपने बुलेटिन में यह जानकारी दी। बाढ़ की भयावहता के बीच असम सरकार ने लापता लोगों की तलाश और उनके परिजनों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नयी दिल्ली स्थित असम भवन में आपातकालीन हेल्प डेस्क स्थापित किया है। एएसडीएमए के अनुसार, लापता लोगों में कामरूप (मेट्रो) के तीन, कर्बी आंगलोंग के तीन, नलबाड़ी के दो तथा गोलाघाट और होजाई के एक-एक व्यक्ति शामिल हैं। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में हैं तथा लापता लोगों के बारे में उपलब्ध सूचनाओं का सत्यापन किया जा रहा है।
पहले 12 लोग थे लापता, दो सुरक्षित मिले
एएसडीएमए ने इससे पहले नेपाल बाढ़ में असम के 12 लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। बाद में नलबाड़ी जिले के दो लोगों के परिजनों ने प्रशासन को बताया कि वे सुरक्षित हैं। इसके बाद लापता लोगों की संख्या घटकर 10 रह गई। कर्बी आंगलोंग प्रशासन ने भी बताया है कि जिले के तीन लापता लोगों में से एक के परिजनों ने उसके सुरक्षित होने की पुष्टि की है। हालांकि, एएसडीएमए की ओर से अभी उसकी सुरक्षित होने की आधिकारिक पुष्टि किया जाना बाकी है। इस कारण राज्य की आधिकारिक सूची में फिलहाल 10 लोग लापता बताए गए हैं।
इन जिलों के लोग लापता
एएसडीएमए के बुलेटिन के अनुसार लापता लोगों की सूची में—
- कामरूप (मेट्रो): डॉ. दीपाली सरकार, पंकज नियोग और मानस कुमार घोष
- कर्बी आंगलोंग: ऋतुपर्णो ब्रह्मा, मोंत्री बसुमतारी और सोमेश्वर नर्ज़ारी
- नलबाड़ी: अरुण नाथ और डॉ. तीर्थ चालिहा
- गोलाघाट: राहुल दैमारी
- होजाई: शतदल नाथ
शामिल हैं। इन लोगों के परिवारों में अपने परिजनों की जानकारी को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रशासन की ओर से संबंधित परिवारों के संपर्क में रहने और नेपाल में चल रहे बचाव एवं खोज अभियान से मिलने वाली सूचनाओं को साझा करने का प्रयास किया जा रहा है।
असम भवन में बनाया गया आपातकालीन हेल्प डेस्क
असम सरकार ने लापता लोगों और नेपाल में फंसे राज्य के नागरिकों के परिजनों की सहायता के लिए नयी दिल्ली स्थित असम भवन में आपातकालीन हेल्प डेस्क स्थापित किया है। सरकार ने इस संकट के दौरान लोगों को आधिकारिक माध्यमों से जानकारी हासिल करने और किसी भी अफवाह पर भरोसा नहीं करने की सलाह दी है। नेपाल में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के कारण दूरदराज के इलाकों से संपर्क भी प्रभावित हुआ है। इससे लापता लोगों के बारे में तत्काल और पुख्ता जानकारी जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नेपाल में तबाही, 626 लोगों की मौत
बुधवार को नेपाल के रसुवा और मध्य नेपाल के कई हिस्सों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। नेपाल रेड क्रॉस के अनुसार, रसुवा जिले में बाढ़ ने टिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी समेत कई इलाकों को प्रभावित किया और महत्वपूर्ण सड़क तथा ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, मध्य नेपाल में और शव बरामद होने के बाद बाढ़ एवं उससे जुड़ी आपदा में मरने वालों की संख्या 626 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव और तलाश अभियान जारी है।
बाढ़ का असर कई जिलों तक फैला
आपदा की शुरुआत नेपाल-चीन सीमा के निकट रसुवा क्षेत्र से हुई और तेज बहाव के साथ बाढ़ का पानी तथा मलबा भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में नीचे की ओर बढ़ा। टिमुरे और रसुवागढ़ी जैसे सीमावर्ती इलाकों में भारी नुकसान हुआ। इसके बाद बाढ़ का प्रभाव नुवाकोट, धादिंग और अन्य निचले इलाकों तक पहुंचा। बाढ़ के कारण कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल में अभी भी नए सिरे से बाढ़ के खतरे को लेकर निगरानी की जा रही है।
असम के परिवारों को अपनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार
नेपाल में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने के बीच असम के 10 नागरिकों की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। राज्य प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की स्थिति का पता लगाना और नेपाल के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।