सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार आशा वर्कर्स यूनियन (सीटू) की आमसभा 1 अगस्त श्री विजयपुरम में आयोजित की गई। बैठक में आशा कार्यकर्ताओं की विभिन्न समस्याओं, मानदेय, भत्तों तथा अन्य लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं को देश में सबसे कम मानदेय मिल रहा है, जबकि वे स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। बैठक को संबोधित करते हुए सीटू राज्य समिति के महासचिव बी. चंद्रचूड़न ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को उनके कार्य के अनुरूप सम्मानजनक पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। उन्होंने देशभर में श्रमिकों, किसानों, युवाओं और छात्रों द्वारा केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलनों की भी जानकारी दी और आशा कार्यकर्ताओं से अपने अधिकारों के लिए संगठित रहने का आह्वान किया। सीटू राज्य समिति के अध्यक्ष आर. सुरेंद्रन पिल्लै ने भी बैठक को संबोधित करते हुए अंडमान एवं निकोबार में कार्यरत सभी आशा कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठित प्रयासों से ही कर्मचारियों के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सकती है। बैठक में सीटू राज्य समिति के उपाध्यक्ष डी. अय्यप्पन ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के लगातार आंदोलन और प्रशासन पर बनाए गए दबाव का ही परिणाम है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में उनके मानदेय में वृद्धि को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को कई बार 24 घंटे तक कार्य करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अत्यंत कम मानदेय दिया जाता है, जो उनके कार्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है। अंडमान एवं निकोबार आशा वर्कर्स यूनियन की महासचिव अंबुमलार ने संगठन की गतिविधियों एवं कार्यों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बैठक की अध्यक्षता एम. हाजरा ने की। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों पर सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया। आमसभा में सर्वसम्मति से अंबुमलार को अध्यक्ष, साबिदा बानो को महासचिव तथा देवकी मुंडा को कोषाध्यक्ष निर्वाचित किया गया। बैठक में पारित एक प्रस्ताव के माध्यम से मांग की गई कि अंडमान एवं निकोबार की आशा कार्यकर्ताओं को पुडुचेरी की आशा कार्यकर्ताओं के समान मानदेय दिया जाए। प्रस्ताव में कहा गया कि हाल ही में पुडुचेरी में आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, इसलिए अंडमान एवं निकोबार की आशा कार्यकर्ताओं को भी समान सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। एक अन्य प्रस्ताव में उत्तर एवं मध्य अंडमान जिले की आशा कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। इसके अलावा सभी आधिकारिक बैठकों में भाग लेने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को टीए/डीए प्रदान करने की भी मांग उठाई गई। बैठक में यह भी मांग की गई कि उत्तर एवं मध्य अंडमान की सभी आशा कार्यकर्ताओं को पुनः वर्दी उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि वर्ष 2012 के बाद से वर्दी वितरण बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही उत्तर एवं मध्य अंडमान जिले की आशा कार्यकर्ताओं को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की ओर से मिलने वाला 500 रुपये प्रतिमाह का अंशदान भी पुनः शुरू करने की मांग की गई। आमसभा में आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सरकार को उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर उन्हें सम्मानजनक मानदेय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।