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सीमाओं का ‘गौरवशाली प्रहरी’ है अरुणाचल प्रदेश : सी. पी. राधाकृष्णन

कहा, पूर्वोत्तर बनेगा विकास का प्रमुख इंजन

ईटानगर : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत की एकता और अखंडता का अभिन्न हिस्सा है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति से मिली नई गति के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के विकास का प्रमुख इंजन बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति और अरुणाचल प्रदेश का विकास एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उपराष्ट्रपति ने यहां अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए राज्य को भारत की सीमाओं का ‘गौरवशाली प्रहरी’ बताया। उन्होंने कहा कि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अरुणाचल प्रदेश न केवल देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के कारण भी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

पूर्वोत्तर की विकास क्षमता पर जोर

राधाकृष्णन ने कहा कि केंद्र की विभिन्न सरकारों ने समय-समय पर पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) का गठन किया गया था, जिसने क्षेत्र के विकास के लिए संस्थागत आधार तैयार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति ने पूर्वोत्तर के विकास को नई दिशा और गति दी है। प्रधानमंत्री द्वारा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को ‘अष्ट लक्ष्मी’ कहे जाने का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह इन राज्यों में मौजूद विशाल संभावनाओं को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामरिक ताकत का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। बेहतर संपर्क, बुनियादी ढांचे, पर्यटन, कृषि, प्राकृतिक संसाधनों और व्यापार के विकास से क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के बजट का उल्लेख

उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष के केंद्रीय बजट में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के लिए 6,800 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रति केंद्र सरकार के निरंतर ध्यान और विकास की प्रतिबद्धता का संकेत बताया। राधाकृष्णन ने कहा कि पूर्वोत्तर को देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। सड़क, परिवहन, संचार और अन्य सुविधाओं में सुधार से दूरदराज के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

79 प्रतिशत क्षेत्र में वन, जैव विविधता की अमूल्य संपदा

अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य का लगभग 79 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि राज्य जंगलों, नदियों, समृद्ध जैव विविधता और विभिन्न पारिस्थितिक संसाधनों से संपन्न है। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संपदा केवल राज्य की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। वन क्षेत्र जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

कीवी उत्पादन और कृषि क्षेत्र की उपलब्धियां

उपराष्ट्रपति ने राज्य के कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश देश में कीवी फल का सबसे बड़ा उत्पादक बनकर उभरा है। यह उपलब्धि राज्य की कृषि क्षमता और यहां की जलवायु एवं प्राकृतिक परिस्थितियों की अनुकूलता को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि राज्य के किसानों को एक लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इससे किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है तथा वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा देने में सहायता मिलती है।

प्रति व्यक्ति आय दोगुने से अधिक, सड़क निर्माण में तेजी

राधाकृष्णन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में पिछले वर्षों के दौरान आर्थिक विकास के साथ बुनियादी ढांचे का भी विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय दोगुने से अधिक हो गई है।उन्होंने सड़क निर्माण की गति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में अब करीब 1,800 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रतिवर्ष किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले अरुणाचल प्रदेश में सड़क संपर्क का विस्तार आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच के लिए महत्वपूर्ण है।

विकास और विरासत के बीच संतुलन जरूरी

उपराष्ट्रपति ने अरुणाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और विरासत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य में असीम संभावनाएं हैं और प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ इसकी जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत भी इसकी विशिष्ट पहचान है। उन्होंने विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा को सुरक्षित रखते हुए विकास की गति को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य के रूप में अरुणाचल प्रदेश का विकास केवल स्थानीय लोगों की समृद्धि से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भारत की समग्र विकास यात्रा से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

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