नई दिल्ली-ईटानगर : अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में सरकारी कर्ज के बोझ के मामले में अरुणाचल प्रदेश देश के राज्यों में सबसे ऊपर है। ‘बिजनेस स्टैंडर्ड इंडिया स्टेट फिस्कल हेल्थ ट्रैकर’ के अनुसार, 2024-25 के बजट अनुमानों (BE) में अरुणाचल प्रदेश की बकाया देनदारियां उसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की 57 प्रतिशत थीं। यानी राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले उसकी बकाया देनदारियां काफी ऊंचे स्तर पर हैं। कर्ज-GSDP अनुपात के मामले में अरुणाचल प्रदेश के बाद पंजाब 46.6 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश 45.2 प्रतिशत के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद पश्चिम बंगाल 39.3 प्रतिशत और मेघालय 38.8 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक कर्ज बोझ वाले राज्यों में शामिल रहे। इन आंकड़ों से पता चलता है कि पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों में भी कर्ज का दबाव काफी अलग-अलग है। अरुणाचल प्रदेश का 57 प्रतिशत कर्ज-GSDP अनुपात कम कर्ज वाले राज्यों की तुलना में कई गुना अधिक है।
दिल्ली से 55.7 प्रतिशत अंक ज्यादा कर्ज अनुपात
अरुणाचल प्रदेश और दिल्ली के बीच कर्ज-GSDP अनुपात में 55.7 प्रतिशत अंक का बड़ा अंतर है। 2024-25 के बजट अनुमानों में दिल्ली की बकाया देनदारियां उसके GSDP की महज 1.3 प्रतिशत थीं।
वहीं, अरुणाचल प्रदेश में यह अनुपात 57 प्रतिशत रहा। इस तुलना से राज्यों की अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले उनकी देनदारियों में मौजूद भारी अंतर का पता चलता है। कम कर्ज-GSDP अनुपात वाले राज्यों में दिल्ली के बाद ओडिशा 16.3 प्रतिशत, गुजरात 17.9 प्रतिशत, महाराष्ट्र 19 प्रतिशत और उत्तराखंड 24.2 प्रतिशत पर रहे। इन सभी राज्यों और दिल्ली की बकाया देनदारियां उनके GSDP के 25 प्रतिशत से कम थीं। इसके उलट अरुणाचल प्रदेश का अनुपात 57 प्रतिशत होना राज्य के सामने अपेक्षाकृत अधिक संचित कर्ज का दबाव दिखाता है।
कर्ज-GSDP अनुपात से क्यों होती है तुलना?
किसी राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन केवल उस पर मौजूद कुल कर्ज से करना पर्याप्त नहीं है। कर्ज-GSDP अनुपात राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में उसकी देनदारियों को दर्शाता है।
बड़ी अर्थव्यवस्था वाले राज्य स्वाभाविक रूप से अधिक मात्रा में कर्ज ले सकते हैं। इसलिए कर्ज को GSDP के प्रतिशत के रूप में देखने से अलग-अलग आकार की अर्थव्यवस्थाओं के बीच अधिक सार्थक तुलना संभव होती है। आमतौर पर ऊंचा कर्ज-GSDP अनुपात राज्य पर अधिक संचित कर्ज के दबाव का संकेत देता है। कर्ज और ब्याज भुगतान के लिए यदि सरकार के राजस्व का बड़ा हिस्सा खर्च होता है, तो विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और अन्य सार्वजनिक खर्च के लिए उपलब्ध राजकोषीय गुंजाइश कम हो सकती है। हालांकि, केवल कर्ज-GSDP अनुपात के आधार पर किसी राज्य की पूरी वित्तीय स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता। राजस्व संग्रह, आर्थिक विकास, ब्याज भुगतान और सरकारी खर्च का स्वरूप भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आरबीआई के आंकड़ों पर आधारित है रिपोर्ट
‘इंडिया स्टेट फिस्कल हेल्थ ट्रैकर’ के ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘Handbook of Statistics on Indian States 2025’ में उपलब्ध 2024-25 के बजट अनुमानों पर आधारित हैं। ट्रैकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्थिति का आकलन आठ राजकोषीय संकेतकों के आधार पर करता है। अरुणाचल प्रदेश का 57 प्रतिशत कर्ज-GSDP अनुपात 2024-25 के बजट अनुमानों पर आधारित है, न कि अंतिम लेखे-जोखे पर। वास्तविक उधारी, खर्च और आर्थिक वृद्धि बजट तैयार करते समय लगाए गए अनुमानों से अलग हो सकती है। इसलिए अंतिम खातों के आंकड़े आने के बाद राज्य की वास्तविक कर्ज स्थिति में कुछ बदलाव संभव है। फिर भी उपलब्ध आंकड़े यह संकेत देते हैं कि अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में कर्ज के दबाव के मामले में अरुणाचल प्रदेश की स्थिति सबसे चुनौतीपूर्ण राज्यों में है।