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पेट का कैंसर बना अरुणाचल की सबसे बड़ी चिंता, 74% कैंसर तंबाकू से जुड़े

सामने आई एक नई रिपोर्ट

Krishna Das Parth

ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश में कैंसर के बढ़ते बोझ को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने राज्य के पश्चिमी हिस्से में पेट के कैंसर की प्रमुखता और तंबाकू से जुड़े कैंसर के उच्च अनुपात को रेखांकित किया है। ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज एपिडेमियोलॉजी (ICMR-NINE) की ‘अरुणाचल प्रदेश कैंसर बर्डन प्रोफाइल 2026’ के अनुसार, पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश में पुरुषों और महिलाओं दोनों में पेट का कैंसर सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर रहा है। रिपोर्ट 2015-2019 के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के आंकड़ों पर आधारित है। इसके मुताबिक पश्चिमी अरुणाचल में इस अवधि के दौरान पुरुषों में दर्ज कैंसर मामलों में पेट के कैंसर की हिस्सेदारी 19.5 प्रतिशत रही। महिलाओं में भी पेट का कैंसर सबसे ऊपर रहा और कुल कैंसर मामलों में इसकी हिस्सेदारी 16.2 प्रतिशत थी।

पुरुषों में लिवर, महिलाओं में स्तन कैंसर दूसरे स्थान पर

पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश में पुरुषों के कैंसर मामलों में पेट के कैंसर के बाद लिवर कैंसर दूसरे स्थान पर रहा। रिपोर्ट के अनुसार 2015-19 के दौरान पुरुषों में लिवर कैंसर की हिस्सेदारी 18.8 प्रतिशत थी।

महिलाओं में पेट के कैंसर के बाद ब्रेस्ट कैंसर दूसरे स्थान पर रहा। इस दौरान महिलाओं में दर्ज कैंसर मामलों में ब्रेस्ट कैंसर की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत रही। इस तरह क्षेत्र में पुरुषों और महिलाओं के बीच कैंसर के प्रमुख प्रकारों में कुछ अंतर दिखाई देता है, लेकिन दोनों समूहों में पेट का कैंसर सबसे अधिक दर्ज किया गया।

2026 में 670 नए कैंसर मामलों का अनुमान

रिपोर्ट में 2026 के लिए राज्य में कैंसर के नए मामलों का अनुमान भी प्रस्तुत किया गया है। इसके अनुसार 19 वर्ष से अधिक आयु की आबादी में कुल 670 नए कैंसर मामलों के सामने आने का अनुमान है। इनमें: 359 मामले पुरुषों में, 311 मामले महिलाओं में होने का अनुमान है। पेट के कैंसर के लिए 2026 का अनुमान पुरुषों में 69 नए मामले और महिलाओं में 46 नए मामले का है। रिपोर्ट के मुताबिक ये आंकड़े कैंसर के पहले उपलब्ध मामलों और अनुमानित आबादी में दर्ज रुझानों के आधार पर तैयार किए गए हैं।

पुरुषों में करीब तीन-चौथाई कैंसर तंबाकू से जुड़े वर्ग में

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष पश्चिमी अरुणाचल में तंबाकू से जुड़े कैंसर के मामलों के उच्च अनुपात से संबंधित है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के वर्गीकरण के आधार पर 2015-19 के दौरान पश्चिमी अरुणाचल में पुरुषों में दर्ज कैंसर मामलों में 74.4 प्रतिशत मामले तंबाकू से जुड़े कैंसर की श्रेणी में रखे गए। महिलाओं में यह अनुपात भी काफी अधिक रहा और 52.9 प्रतिशत कैंसर मामले तंबाकू से जुड़े कैंसर की श्रेणी में आए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि तंबाकू से जुड़े कैंसर के मामलों में अकेले पेट के कैंसर की हिस्सेदारी पुरुषों में 26 प्रतिशत और महिलाओं में 31 प्रतिशत थी।

तंबाकू से जुड़े कैंसर की श्रेणी काफी व्यापक

ICMR के वर्गीकरण में तंबाकू से जुड़े कैंसर की श्रेणी में शरीर के कई हिस्सों में होने वाले कैंसर शामिल किए जाते हैं। इनमें होंठ, जीभ, मुंह, भोजन नली (ओसोफैगस), पेट, लिवर, फेफड़े, गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), मूत्राशय और अन्य अंगों के कैंसर शामिल हैं। हालांकि रिपोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सावधानी भी दर्ज की है। तंबाकू से जुड़े कैंसर की श्रेणी में किसी कैंसर को शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्तिगत मामला तंबाकू के इस्तेमाल के कारण ही हुआ है। यह वर्गीकरण उन कैंसरों को समूहबद्ध करता है जिनका तंबाकू के संपर्क से संबंध स्थापित किया गया है।

राज्य में पुरुषों में तंबाकू इस्तेमाल की दर अधिक

फैक्टशीट में दिए गए NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में तंबाकू इस्तेमाल का स्तर पुरुषों में महिलाओं की तुलना में काफी अधिक है।

आंकड़ों के अनुसार इस आयु वर्ग में: 50.3 प्रतिशत पुरुष और 18.8 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का इस्तेमाल करती हैं। शराब के इस्तेमाल के मामले में भी पुरुषों का अनुपात महिलाओं से अधिक दर्ज किया गया। रिपोर्ट में 52.7 प्रतिशत पुरुषों और 24.2 प्रतिशत महिलाओं के शराब इस्तेमाल की जानकारी दी गई है। ये आंकड़े राज्य में कैंसर की रोकथाम के लिए जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारकों पर ध्यान देने की आवश्यकता को भी रेखांकित करते हैं।

नए अनुमान की तुलना पुराने आंकड़ों से सावधानी जरूरी

रिपोर्ट ने 2026 और 2030 के लिए कैंसर के अनुमानों को कैंसर के मामलों और अनुमानित आबादी में दर्ज रुझानों के आधार पर तैयार किया है। हालांकि, रिपोर्ट में पुराने और नए अनुमानों की सीधे तुलना करने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इसके पीछे वजह यह है कि नए अनुमानों में अपडेटेड कैंसर रजिस्ट्री डेटा, आबादी आधारित अतिरिक्त कैंसर रजिस्ट्रियों और बेहतर अनुमान पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया है। इसलिए पुराने अनुमान की तुलना में नए आंकड़ों में आया अंतर जरूरी नहीं कि कैंसर के वास्तविक बोझ में हुए बदलाव को ही दर्शाता हो।

रोकथाम और शुरुआती पहचान पर जोर की जरूरत

पश्चिमी अरुणाचल में पेट के कैंसर की सबसे अधिक हिस्सेदारी और तंबाकू से जुड़े कैंसर के उच्च अनुपात के मद्देनजर रिपोर्ट राज्य में कैंसर की रोकथाम, जोखिम कारकों में कमी, जागरूकता और समय पर जांच के महत्व को सामने लाती है। विशेष रूप से तंबाकू इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को देखते हुए तंबाकू नियंत्रण और लोगों को इसके स्वास्थ्य प्रभावों के प्रति जागरूक करने की रणनीतियां महत्वपूर्ण हो सकती हैं। वहीं पेट के कैंसर के मामलों की अधिक संख्या को देखते हुए शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर चिकित्सा जांच भी कैंसर नियंत्रण की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है।

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