फोटो में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा के साथ उत्तर एवं मध्य अंडमान जिला परिषद के अध्यक्ष आर. अलगर स्वामी की मुलाकात का दृश्य। 
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अलगर स्वामी ने उपराज्यपाल से राजमार्ग बिजली स्वास्थ्य पर्यटन मुद्दे उठाए

उत्तर मध्य अंडमान की लंबित समस्याओं पर चर्चा

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम – राष्ट्रीय राजमार्ग-4 की खराब स्थिति, चिकित्सकों की कमी, लंबे समय से जारी बिजली संकट, पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आवास, शिक्षा संबंधी ढांचा और पर्यटन विकास सहित उत्तर एवं मध्य अंडमान से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा के समक्ष उत्तर एवं मध्य अंडमान जिला परिषद के अध्यक्ष आर. अलगर स्वामी ने हाल ही में हुई अपनी मुलाकात के दौरान उठाए।

सन्मार्ग संवाददाता से मुलाकात के बारे में बातचीत करते हुए अलगर स्वामी ने कहा कि नए उपराज्यपाल की प्रतिक्रिया से उन्हें उत्साह मिला है और उन्हें महसूस हुआ कि प्रशासन अब उत्तरी क्षेत्र को प्रभावित करने वाली लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए मजबूत इच्छा शक्ति दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात शिष्टाचार भेंट थी, जिसके दौरान उन्होंने उत्तर एवं मध्य अंडमान की कई गंभीर समस्याओं को उपराज्यपाल के समक्ष रखा।

अलगर स्वामी के अनुसार, बाराटांग से डिगलीपुर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-4 की खराब स्थिति उनके द्वारा उठाया गया पहला प्रमुख मुद्दा था। उन्होंने कहा कि राजमार्ग पर लगभग नौ वर्षों से काम चल रहा है, लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण पूरा कर राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा उसे सौंपा नहीं गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर एवं मध्य अंडमान और श्री विजय पुरम के बीच यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की खराब स्थिति के कारण लगातार काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अलगर स्वामी ने कहा कि उपराज्यपाल ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कथित तौर पर संकेत दिया कि ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डॉ. शर्मा ने यह भी इच्छा व्यक्त की कि वे जल्द ही उत्तर एवं मध्य अंडमान का दौरा करेंगे और व्यक्तिगत रूप से राजमार्ग की स्थिति का निरीक्षण करेंगे।

बैठक के दौरान उत्तर एवं मध्य अंडमान में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। अलगर स्वामी ने कहा कि कई क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी है और अन्य चिकित्सा संबंधी कठिनाइयां भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि क्षेत्र की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

उठाया गया एक अन्य प्रमुख मुद्दा विशेष रूप से रंगत-बाराटांग क्षेत्र में जारी बिजली संकट था। अलगर स्वामी ने कहा कि कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बिजली उपलब्ध नहीं रहने से स्थानीय निवासियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया कि बिजली से संबंधित चल रहे कार्यों में तेजी लाई जाएगी और समस्या का जल्द से जल्द समाधान करने के प्रयास किए जाएंगे।

अलगर स्वामी ने श्री विजय पुरम में जिला परिषद के प्रतिनिधियों और उत्तर एवं मध्य अंडमान के उन निवासियों के लिए जिला परिषद आवास के निर्माण की अपनी पुरानी मांग भी फिर से उठाई, जो चिकित्सा उपचार, सरकारी कार्य और अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए राजधानी आते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व उपराज्यपाल एडमिरल डी.के. जोशी के कार्यकाल के दौरान भी यह मामला उठाया गया था और भूमि आवंटन से संबंधित दस्तावेजों की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, लेकिन प्रस्ताव अभी तक साकार नहीं हो सका है।

उन्होंने कहा कि समर्पित जिला परिषद आवास बनने से वर्तमान में श्री विजय पुरम आने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को निजी आवासों पर निर्भर रहने की समस्या से काफी राहत मिलेगी। अलगर स्वामी ने बताया कि उत्तर एवं मध्य अंडमान में 17 जिला परिषद सदस्य, 37 प्रधान, 37 पंचायत समिति सदस्य और 350 से अधिक अन्य पंचायत प्रतिनिधि हैं। इसके अलावा विभिन्न कार्यों के लिए नियमित रूप से राजधानी आने वाले स्थानीय निवासी भी बड़ी संख्या में हैं।

बैठक में शिक्षा भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। अलगर स्वामी ने कहा कि जिला परिषद के अंतर्गत संचालित चार विद्यालय कदमतला, बसंतीपुर, पहल गांव और डिगलीपुर में स्थित हैं। जहां डिगलीपुर का विद्यालय बारहवीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान करता है, वहीं अन्य तीन विद्यालय वर्तमान में केवल दसवीं कक्षा तक संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कदमतला, बसंतीपुर और पहल गांव के विद्यालयों को उच्चतर माध्यमिक स्तर तक उन्नत करने का अनुरोध किया।

उन्होंने इन संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के तुलनात्मक रूप से कम वेतन का मुद्दा भी उठाया और शिक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित राशि में वृद्धि की मांग की, ताकि शिक्षकों के पारिश्रमिक में सुधार किया जा सके और विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।

अलगर स्वामी ने बाराटांग के खेल मैदान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि खेल मैदान के लिए भूमि वर्ष 1995 में आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय से विकास कार्य लंबित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र के बच्चों में खेल प्रतिभा काफी है, लेकिन उनके पास पर्याप्त सुविधाएं और उचित खेल मैदान नहीं है।

जिला परिषद अध्यक्ष ने आगामी जिला योजना समिति की बैठक के बारे में भी चर्चा की, जो 26, 27 और 28 अक्टूबर को प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि पंचायत समितियों की कई विकास योजनाएं जिला योजना समिति के समक्ष रखी जाएंगी और यह बैठक उत्तर एवं मध्य अंडमान में विकास गतिविधियों को गति देने में सहायक होगी।

बैठक में पर्यटन विकास पर भी प्रमुखता से चर्चा हुई। अलगर स्वामी ने कहा कि उपराज्यपाल ने संकेत दिया है कि उत्तर एवं मध्य अंडमान की अपनी प्रस्तावित यात्रा के दौरान पर्यटन प्रमुख क्षेत्रों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि बाराटांग की चूना पत्थर की गुफाएं, डिगलीपुर के रॉस और स्मिथ द्वीप तथा लॉन्ग द्वीप पर्यटन की दृष्टि से काफी संभावनाएं रखते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन के महत्व को रेखांकित करते हुए अलगर स्वामी ने कहा कि उत्तर एवं मध्य अंडमान में बड़ी संख्या में युवा अब पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से आजीविका के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बाराटांग का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लगभग 200 फाइबर की नावें पर्यटन गतिविधियों में लगी हुई हैं और प्रत्येक नाव पर लगभग तीन लोग कार्य करते हैं। उनके अनुसार, इसके परिणामस्वरूप कई परिवारों की आजीविका इन पर्यटन संबंधी गतिविधियों पर निर्भर है।

उन्होंने क्षेत्र में पर्यटन अतिथि गृह के निर्माण के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को भी उठाया। अलगर स्वामी ने कहा कि लगभग 15 वर्ष पहले पर्यटन विभाग द्वारा लगभग 15 से 20 कमरों वाले अतिथि गृह के निर्माण के लिए भूमि आवंटित किए जाने की जानकारी थी, लेकिन अब तक यह सुविधा निर्मित नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अतिथि गृह के निर्माण से पर्यटकों के लिए आवास की सुविधा उपलब्ध होगी और अधिक समय तक पर्यटकों के ठहरने को प्रोत्साहित करके स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा पर्यटन से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

अलगर स्वामी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उपराज्यपाल के समक्ष रखे गए मुद्दों पर उचित ध्यान दिया जाएगा और उत्तर एवं मध्य अंडमान की उनकी प्रस्तावित यात्रा क्षेत्र की लंबे समय से लंबित विकास संबंधी चिंताओं का जमीनी स्तर पर आकलन करने का अवसर प्रदान करेगी।

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