अंडमान और निकोबार प्रदेश कांग्रेस समिति के अभियान समिति अध्यक्ष टीएसजी भास्कर का चित्र।  
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भास्कर ने जीबी पंत अस्पताल में चिकित्सा संकट पर तत्काल जांच मांगी

शल्य सामग्री की कमी पर प्रशासन से कार्रवाई का आग्रह

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --

अंडमान और निकोबार प्रदेश कांग्रेस समिति के अभियान समिति के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने जीबी पंत अस्पताल में आवश्यक शल्य चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की कथित अनुपलब्धता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने उपराज्यपाल से तत्काल जांच शुरू करने और द्वीपों में बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है।

उपराज्यपाल को भेजे पत्र में भास्कर ने उन मरीजों की परेशानी का उल्लेख किया जिन्हें कथित रूप से शल्य चिकित्सा से पहले दस्ताने, इंजेक्शन, हड्डी संबंधी प्रत्यारोपण और अन्य आवश्यक शल्य सामग्री निजी दवा दुकानों से खरीदने के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब मरीजों, विशेषकर दूरदराज के द्वीपों से आने वाले लोगों को इससे भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कथित रूप से कुछ आपातकालीन शल्य चिकित्सा तब तक टल जाती हैं, जब तक परिवार आवश्यक सामग्री की व्यवस्था नहीं कर लेते।

भास्कर ने सवाल उठाया कि सरकारी ई-बाजार व्यवस्था के माध्यम से आवश्यक चिकित्सा सामग्री की खरीद होने के बावजूद जरूरी सामान उपलब्ध क्यों नहीं है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया, आपूर्ति व्यवस्था और चिकित्सा सामग्री की गुणवत्ता की पूरी जांच की मांग की। उन्होंने उन शिकायतों की भी जांच की मांग की जिनमें मरीजों को कथित रूप से कुछ विशेष निजी दवा दुकानों और आपूर्तिकर्ताओं की ओर भेजे जाने की बात कही गई है। कथित निम्न गुणवत्ता वाली चिकित्सा सामग्री से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने संदिग्ध संक्रमण के बाद हर्निया के मरीजों में दोबारा शल्य चिकित्सा किए जाने की रिपोर्टों की भी जांच का आग्रह किया।

उन्होंने अस्पताल में मौजूदा शल्य चिकित्सा कक्षों की अपर्याप्त व्यवस्था का भी मुद्दा उठाया और उचित स्वच्छता तथा संक्रमण नियंत्रण मानकों के साथ आधुनिक और पूरी तरह सुसज्जित शल्य चिकित्सा परिसर की मांग की। भास्कर ने हृदय रोग, तंत्रिका रोग और गुर्दा रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसके कारण मरीजों को मुख्य भूमि पर उपचार के लिए जाना पड़ता है, जहां स्ट्रेचर पर मरीज को हवाई मार्ग से ले जाने में लगभग 4 से 5 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं।

भास्कर ने उत्तर और मध्य अंडमान तथा निकोबार जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इसके कारण गंभीर प्रसूति मामलों को देर से जीबी पंत अस्पताल भेजना पड़ रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों के सामने अतिरिक्त कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।

तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए भास्कर ने व्यापक जांच, आवश्यक चिकित्सा सामग्री की विभागवार सूची तैयार करने, विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं में सुधार तथा अस्पताल के बुनियादी ढांचे के तत्काल आधुनिकीकरण की मांग की।

भास्कर ने कहा कि किसी भी मरीज की मृत्यु चिकित्सकों, आवश्यक शल्य चिकित्सा उपकरणों या बुनियादी चिकित्सा सामग्री की अनुपलब्धता के कारण नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर प्रत्येक मरीज को समय पर और उचित चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

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