श्री विजय पुरम नगर परिषद कार्यालय का दृश्य। 
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नगर परिषद और जिला परिषद अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष हो

जी भास्कर ने उपराज्यपाल को लिखा पत्र

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम -- अंडमान और निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अभियान समिति के अध्यक्ष जी भास्कर ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर नगर परिषद और जिला परिषद के अध्यक्ष के चुनाव में सुधार की मांग की है।

12 अक्टूबर 2026 को लिखे अपने पत्र में भास्कर ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में नगर परिषद के अध्यक्ष और जिला परिषद के अध्यक्ष का हर वर्ष चुनाव कराने की मौजूदा व्यवस्था से उत्पन्न गंभीर चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने कहा कि नगर परिषद के पार्षद और जिला परिषद के सदस्य जनता द्वारा पांच वर्ष के लिए चुने जाते हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में नगर परिषद अध्यक्ष और जिला परिषद अध्यक्ष का कार्यकाल केवल एक वर्ष का होता है, जिसके कारण हर वर्ष बार-बार चुनाव कराने पड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण पदों के छोटे कार्यकाल के कारण अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए खरीद-फरोख्त, राजनीतिक अस्थिरता और क्रॉस वोटिंग के आरोप और आशंकाएं सामने आई हैं। इन पदों के लिए बार-बार होने वाले मुकाबले जनता के लोकतांत्रिक जनादेश को भी कमजोर करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि नेतृत्व में बदलाव का विकास कार्यों पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। केवल एक वर्ष के लिए पद संभालने वाला अध्यक्ष न तो नीतियां बना पाता है और न ही विकास परियोजनाएं लागू कर पाता है, साथ ही किसी अध्यक्ष द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों में निरंतरता भी नहीं रहती।

भास्कर ने बताया कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नगर निगमों के महापौर या अध्यक्ष और जिला परिषदों के अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष का है। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल (कोलकाता) और आंध्र प्रदेश राज्यों तथा दिल्ली, पुडुचेरी, लद्दाख और दादरा एवं नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेशों में पांच वर्ष का कार्यकाल है। उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों में नगर परिषद और जिला परिषद के अध्यक्ष का सीधा चुनाव होता है और जनता इन पदों के लिए सीधे मतदान करती है।

यह कहते हुए कि उपराज्यपाल जमीनी राजनीति से उभरे हैं, नगर निगम में सेवा दे चुके हैं और शहरी स्थानीय निकायों के व्यावहारिक कामकाज तथा प्रभावी शासन के लिए स्थिर नेतृत्व के महत्व से भली-भांति परिचित हैं, भास्कर ने उनसे इस मुद्दे की जांच करने और ऐसे उपयुक्त सुधारों का मार्ग प्रशस्त करने की अपील की, जिनसे स्थिर नेतृत्व सुनिश्चित हो, राजनीतिक खरीद-फरोख्त रुके और निर्वाचित प्रतिनिधि इन पदों के लिए बार-बार होने वाले मुकाबलों के बजाय विकास पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि इन नेतृत्व पदों के लिए पांच वर्ष का स्थिर कार्यकाल विकास गतिविधियों में निरंतरता सुनिश्चित करेगा।

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