सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम -- वर्तमान समय में वायु प्रदूषण एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो श्वसन संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं। पटाखों के उपयोग से उत्पन्न प्रदूषण के प्रति नागरिकों को जागरूक करना आवश्यक है, क्योंकि इससे संवेदनशील वर्गों के जीवन और स्वास्थ्य पर अधिक गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने आगामी दीपावली पर्व के दौरान वायु प्रदूषण और ध्वनि स्तर की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा मूल आवेदन संख्या 728/2015 के मामले में 23 अक्टूबर 2018 को जारी आदेश के अनुपालन में अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने पटाखे जलाने से उत्पन्न वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं।
इन उपायों के अंतर्गत दीपावली के दौरान पटाखे जलाने का समय केवल दो घंटे निर्धारित किया गया है। प्रशासन के निर्देशानुसार दीपावली पर रात 8:00 बजे से 10:00 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी।
निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अंडमान एवं निकोबार प्रदूषण नियंत्रण समिति आगामी दीपावली पर्व के लिए परिवेशीय वायु गुणवत्ता और ध्वनि स्तर की अल्पकालिक निगरानी कर रही है। यह निगरानी कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप संचालित किया जा रहा है।
समिति ने इस उद्देश्य से एबरडीन बाजार, डॉलीगंज और मीठाखाड़ी में तीन निगरानी केंद्र स्थापित किए हैं। ये केंद्र कुल 15 दिनों तक कार्य करेंगे। निगरानी कार्यक्रम दीपावली से सात दिन पहले, अर्थात 1 नवंबर 2026 से शुरू किया गया है और दीपावली के सात दिन बाद, अर्थात 15 नवंबर 2026 तक जारी रहेगा।
इस अवधि के दौरान वायु में उपस्थित विभिन्न प्रदूषक तत्वों की मात्रा का परीक्षण किया जाएगा। निगरानी के प्रमुख मानकों में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, 10 माइक्रोमीटर और 2.5 माइक्रोमीटर आकार तक के सूक्ष्म कण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त 10 माइक्रोमीटर आकार तक के कणों में मौजूद सीसा, निकल और आर्सेनिक जैसी धातुओं की मात्रा की भी जांच की जाएगी। इसी प्रकार 2.5 माइक्रोमीटर आकार तक के सूक्ष्म कणों में एल्युमिनियम, बेरियम और लौह जैसे चयनित धातु तत्वों की उपस्थिति का परीक्षण किया जाएगा।
वायु गुणवत्ता की निगरानी के साथ-साथ दीपावली से पहले और दीपावली के दिन ध्वनि स्तर की भी निरंतर निगरानी की जाएगी। इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण समिति का निगरानी कार्यक्रम 1 नवंबर से 15 नवंबर तक जारी रहेगा, ताकि त्योहार से पहले और बाद के महत्वपूर्ण सात-सात दिनों के आंकड़े एकत्र किए जा सकें।
परिवेशीय वायु गुणवत्ता का आकलन वायु गुणवत्ता सूचकांक के माध्यम से किया जाता है। इस सूचकांक के अंतर्गत वायु की गुणवत्ता को अच्छी से लेकर गंभीर तक कुल छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इससे नागरिकों को प्रदूषण के स्तर और उससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को समझने में सहायता मिलती है।
वायु गुणवत्ता सूचकांक 0 से 50 के बीच होने पर वायु की स्थिति अच्छी मानी जाती है और स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव न्यूनतम होता है। सूचकांक 51 से 100 के बीच होने पर वायु गुणवत्ता संतोषजनक मानी जाती है, हालांकि संवेदनशील व्यक्तियों को सांस लेने में मामूली परेशानी हो सकती है।
सूचकांक 101 से 200 के बीच होने पर वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में आती है। इस स्थिति में फेफड़ों की बीमारी, दमा और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
सूचकांक 201 से 300 के बीच पहुंचने पर वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में मानी जाती है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने से अधिकांश लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
सूचकांक 301 से 400 के बीच होने पर वायु गुणवत्ता अत्यंत खराब श्रेणी में आती है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।
वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 से अधिक होने पर स्थिति गंभीर मानी जाती है। इस स्तर का प्रदूषण स्वस्थ व्यक्तियों को भी प्रभावित कर सकता है, जबकि पहले से विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य पर इसका अत्यंत गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण समिति के अनुसार, निगरानी अवधि के दौरान एकत्र किए जाने वाले आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक निगरानी केंद्र के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना की जाएगी।
पिछले वर्ष 2025 में एबरडीन बाजार और डॉलीगंज स्थित दोनों निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक संतोषजनक श्रेणी में दर्ज किया गया था।
अंडमान एवं निकोबार प्रदूषण नियंत्रण समिति ने बताया कि त्योहारों के दौरान वायु और ध्वनि की गुणवत्ता बनाए रखने तथा उसमें सुधार लाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के निवासियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना है।