सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम – नई दिल्ली में बुधवार को नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी की अध्यक्षता में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के समग्र, समावेशी और रणनीतिक विकास को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने द्वीपों के विकास के लिए विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। इस दौरान नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. सुब्रह्मण्यम, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनुराग जैन, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव ज्ञानेश भारती तथा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में लगभग 8,249 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 31 आबाद द्वीपों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग विकास नीतियां तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। मुख्य भूमि से निर्माण सामग्री और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर आने वाली अधिक लागत को देखते हुए विभिन्न सरकारी योजनाओं के लागत मानकों और पात्रता शर्तों में उचित छूट देने का अनुरोध किया गया। ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
हवाई संपर्क के विषय में उड़ानों की घटती संख्या और हवाई किराये में बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग-4 के उन्नयन, मिडिल स्ट्रेट पुल के निर्माण, सागरमाला 2.0 के अंतर्गत 13 जेटियों के पुनर्निर्माण तथा नियमित मालवाहक जहाज सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
द्वीपवासियों के दैनिक जीवन से जुड़े मुद्दों में जल जीवन मिशन के तहत पुरानी जलापूर्ति पाइपलाइनों को बदलने, 265 गांवों में जल भंडारण एवं वितरण व्यवस्था सुधारने, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, अंडमान एवं निकोबार चिकित्सा विज्ञान संस्थान में आवश्यक चिकित्सा पदों के सृजन और चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने का विषय भी बैठक में शामिल रहा।
द्वीपों की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए गहरे समुद्र में टूना मछली संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्थानीय रोजगार और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, वाइपर द्वीप और स्वराज द्वीप में पर्यटन विकास को तेज करने पर विचार-विमर्श किया गया। कृषि, शीत भंडारण सुविधाओं, कृषि मशीनीकरण और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत लंबित ग्रामीण सड़क प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप एकीकृत, टिकाऊ और समयबद्ध विकास मॉडल तैयार करना लक्ष्य है। उन्होंने नीति आयोग और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों से लंबित प्रस्तावों पर समयबद्ध निर्णय, योजनाओं में आवश्यक लचीलापन, स्पष्ट नोडल जिम्मेदारियां और नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।