कार निकोबार द्वीप की तस्वीर।  
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कार निकोबार में सूअरों के बीच क्लासिक सूअर ज्वर की पुष्टि

पशुपालकों को टीकाकरण और जैव सुरक्षा अपनाने की सलाह

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम -- कार निकोबार में पिछले चार सप्ताह से सूअरों में बीमारी फैलने की सूचना मिली है। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग द्वारा एकत्र किए गए नमूनों की मुख्य भूमि स्थित निर्धारित प्रयोगशालाओं में जांच की गई, जिसमें क्लासिक सूअर ज्वर की पुष्टि हुई है। केंद्र शासित प्रदेश में इससे पहले 2000 से 2003 के दौरान इस बीमारी के प्रकोप की सूचना मिली थी।

क्लासिक सूअर ज्वर सूअरों को प्रभावित करने वाला अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित रोग है। यह मनुष्यों, मवेशियों या बकरियों को संक्रमित नहीं करता और मानव स्वास्थ्य के लिए इसका कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है। हालांकि यह सूअरों में गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित होती है। समय पर टीकाकरण, तत्काल सूचना और सख्त जैव सुरक्षा, अर्थात संक्रमण को सूअर बाड़ों में प्रवेश करने या एक बाड़े से दूसरे बाड़े में फैलने से रोकने वाले उपाय, बीमारी पर नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

सभी सूअर मालिकों और किसानों को सलाह दी गई है कि बीमार या संदिग्ध सूअरों को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाए तथा उनके लिए भोजन और पानी के अलग बर्तनों का उपयोग किया जाए।

तेज बुखार, भूख कम लगना, दस्त, त्वचा के रंग में बदलाव, कमजोरी या अचानक मृत्यु जैसे लक्षण दिखाई देने पर निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी या वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी को तुरंत सूचना दी जानी चाहिए। बीमारी का केवल एक संदिग्ध मामला सामने आने पर भी बिना अन्य पशुओं के बीमार होने या मृत्यु की प्रतीक्षा किए तत्काल सूचना देना आवश्यक है।

इस बीमारी का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। बीमार पशुओं की देखभाल के लिए निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क किया जाना चाहिए। सहायक उपचार के माध्यम से पशुओं की जान बचाने में मदद मिल सकती है।

6 सप्ताह से अधिक आयु वाले सभी पात्र स्वस्थ पशुओं का पशु चिकित्सा अधिकारियों की सलाह के अनुसार टीकाकरण कराया जाना चाहिए। विभागीय टीकाकरण और निगरानी टीमों को पूरा सहयोग दिया जाना चाहिए।

सूअर बाड़ों, भोजन के बर्तनों, उपकरणों और जूतों की नियमित रूप से सफाई तथा पशु चिकित्सा कर्मचारियों की सलाह के अनुसार उनका संक्रमणरोधी उपचार किया जाना चाहिए। इन सावधानियों से संक्रमण को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने से रोकने में सहायता मिलेगी।

सूअरों को स्वच्छ पीने का पानी और स्वच्छ तथा सुरक्षित चारा उपलब्ध कराया जाना चाहिए। भोजन और पानी के बर्तनों को भी साफ रखा जाना चाहिए।

बीमारी की निगरानी में सहायता के लिए सूअरों की खरीद, पशुओं की आवाजाही, टीकाकरण, बीमारी और मृत्यु का सरल अभिलेख रखा जाना चाहिए।

सूअरों की मृत्यु होने पर पशु चिकित्सा कर्मचारियों को इसकी सूचना दी जानी चाहिए। मृत सूअरों को पशु चिकित्सा अधिकारियों के मार्गदर्शन में निर्धारित सावधानियों का पालन करते हुए गहरे गड्ढे में दफनाया जाना चाहिए।

नए खरीदे गए सूअरों को मौजूदा झुंड में शामिल करने से पहले पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताए गए समय तक अलग स्थान पर रखकर उनकी निगरानी की जानी चाहिए।

बीमार या संदिग्ध सूअरों को बेचना, उनका परिवहन करना, उनका आदान-प्रदान करना या उन्हें काटना नहीं चाहिए, क्योंकि इन गतिविधियों से बीमारी फैल सकती है।

प्रभावित या संदिग्ध स्थानों से सूअरों, सूअर के मांस, मृत पशुओं के शव, उपकरणों या संभावित रूप से संक्रमित सामग्री को पशु चिकित्सा विभाग की अनुमति के बिना दूसरे स्थान पर नहीं ले जाना चाहिए।

कच्चे रसोई अपशिष्ट या सूअर के मांस से बने उत्पादों को सूअरों को नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि इनमें संक्रमण फैलाने वाले कारक मौजूद हो सकते हैं।

सूअर बाड़ों में अनावश्यक रूप से प्रवेश करने से बचना चाहिए। परिसर में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को सफाई और संक्रमणरोधी उपायों का पालन करना चाहिए।

मृत सूअरों को खुले स्थानों या जल स्रोतों में नहीं फेंकना चाहिए, न ही उन्हें बेचना या मानव अथवा पशु उपभोग के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

पशु चिकित्सा टीमें निगरानी, टीकाकरण और जांच के लिए नमूने एकत्र करने का कार्य करेंगी। सभी सूअर मालिकों और किसानों से विभागीय टीमों के साथ सहयोग करने तथा संदिग्ध मामलों की तत्काल सूचना देने का अनुरोध किया गया है।

सूअरों के झुंड और किसानों की आजीविका की सुरक्षा के लिए समय पर सूचना देना तथा इन सावधानियों का सख्ती से पालन करना अत्यंत आवश्यक है। सहायता के लिए टोल फ्री संख्या 112 पर संपर्क किया जा सकता है।

अधिक जानकारी, टीकाकरण में सहायता या बीमारी तथा मृत्यु की सूचना देने के लिए निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क किया जा सकता है। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग की ओर से जारी सार्वजनिक परामर्श में यह जानकारी दी गई है।

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