मायाबंदर जेटी का दृश्य। 
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मायाबंदर और डिगलीपुर के लिए नियमित रात्रिकालीन जहाज सेवा बहाल करने की मांग

यात्रियों की परेशानी दूर करने को अब सेवा बहाली जरूरी

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --

मायाबंदर पंचायत समिति के पूर्व प्रमुख अब्दुल सिद्दीकी ने अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल को पत्र भेजकर मायाबंदर और डिगलीपुर के लोगों के लिए नियमित तथा रात्रिकालीन जहाज सेवाएं बहाल करने की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में बड़े जहाजों की सेवाओं के माध्यम से लोगों को होने वाली सुरक्षित, सुविधाजनक और अपेक्षाकृत किफायती समुद्री यात्रा को फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है।

अब्दुल सिद्दीकी ने उत्तर और मध्य अंडमान जिले के मायाबंदर और डिगलीपुर के लोगों की लंबे समय से चली आ रही परिवहन संबंधी कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 के अंत तक ‘नालंदा’ और ‘सिंधु’ नामक जहाज मायाबंदर और डिगलीपुर के बीच नियमित रूप से संचालित होते थे। सामान्यतः इन जहाजों के संचालन के बीच एक दिन का अंतर रहता था और लगभग सप्ताह में दो बार इनका संचालन होता था। इन सेवाओं के कारण लोग श्री विजय पुरम से आने-जाने के लिए सुरक्षित और अपेक्षाकृत कम खर्च वाली यात्रा कर पाते थे।

सिद्दीकी के अनुसार, इन सेवाओं के बंद होने के बाद मुख्य रूप से तेज गति वाली नौकाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि इन नौकाओं में बड़े जहाजों की तुलना में यात्रियों को ले जाने की क्षमता काफी कम है। बड़े जहाजों में सामान्यतः लगभग 350 से 400 यात्री यात्रा कर सकते थे, जबकि वर्तमान तेज गति वाली नौकाओं में केवल लगभग 100 यात्री ही यात्रा कर सकते हैं। इससे मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और अन्य यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि मायाबंदर और डिगलीपुर से बड़ी संख्या में मरीज बेहतर चिकित्सा उपचार के लिए श्री विजय पुरम आने के लिए मजबूर हैं। उनके अनुसार, तेज गति वाली नौकाओं से यात्रा करने के दौरान मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान ले जाने में भी असुविधा होती है।

सिद्दीकी ने यह भी बताया कि लंबी समुद्री यात्रा के लिए वर्तमान तेज गति वाली नौकाओं में बड़े जहाजों जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इनमें सीमित संख्या में केबिन, बर्थ और डेक की सुविधाएं हैं। उन्होंने कहा कि समुद्री यात्रा के दौरान कुछ यात्रियों को चक्कर आने और उल्टी की समस्या भी होती है। इसके बावजूद लोगों को चिकित्सा उपचार, सरकारी कार्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करनी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि मायाबंदर से श्री विजय पुरम और डिगलीपुर से श्री विजय पुरम के बीच सुविधाजनक सीधी समुद्री परिवहन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण यात्रा कठिन और महंगी हो गई है। लोगों को सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। निजी बसों का किराया कथित तौर पर लगभग 500 से 600 रुपये या उससे अधिक है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

पूर्व प्रमुख ने पहले संचालित होने वाली रात्रिकालीन जहाज सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यात्री अपना काम पूरा करने के बाद शाम को जहाज में सवार होकर रातभर यात्रा करते थे और सुबह श्री विजय पुरम पहुंच जाते थे। इसी प्रकार श्री विजय पुरम से यात्री शाम को जहाज में सवार होकर अगली सुबह मायाबंदर या डिगलीपुर पहुंचते थे। उनके अनुसार, ऐसी सेवाओं से यात्रियों का काफी समय, यात्रा खर्च और परेशानी बचती थी।

सिद्दीकी ने कहा कि यह समस्या केवल सामान्य यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों, बुजुर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मचारियों और आवश्यक कार्यों के लिए श्री विजय पुरम जाने वाले लोगों को भी प्रभावित करती है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पहले भी जहाजरानी सेवा निदेशालय के समक्ष अभ्यावेदन और अनुरोध प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

आगामी दुर्गा पूजा, दीपावली और क्रिसमस के त्योहारों को देखते हुए सिद्दीकी ने सुविधाजनक परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में बड़ी संख्या में लोग पारिवारिक, चिकित्सा, आधिकारिक और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा करेंगे।

उन्होंने उपराज्यपाल से उत्तर और मध्य अंडमान के लोगों की कठिनाइयों पर विचार करते हुए आवश्यक निर्देश जारी करने और मायाबंदर तथा डिगलीपुर के लोगों के हित में आवश्यकता के अनुसार ‘नालंदा’ और ‘सिंधु’ की नियमित सेवाएं जल्द बहाल करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने मायाबंदर और डिगलीपुर तथा श्री विजय पुरम के बीच नियमित रात्रिकालीन जहाज सेवाएं, वापसी सेवाओं सहित, दोबारा शुरू करने की संभावना पर भी विचार करने का अनुरोध किया है।

सिद्दीकी ने कहा कि यह मामला केवल परिवहन सुविधा से जुड़ा नहीं है, बल्कि चिकित्सा उपचार तक पहुंच, बुजुर्गों की सुविधा, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के यात्रा खर्च तथा आम जनता की समग्र सुविधा से भी संबंधित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

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