राज निवास में नियमित जन सुनवाई बहाल करने की मांग को दर्शाता फाइल फोटो। 
देश/विदेश

राज निवास में नियमित जन सुनवाई बहाल करने की मांग

सुलभ और पारदर्शी शिकायत निवारण की मांग

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में लोगों की शिकायतों के त्वरित, सुलभ और पारदर्शी निवारण के लिए राज निवास (लोक निवास) में नियमित जन शिकायत सुनवाई यानी ‘जन सुनवाई’ की व्यवस्था पुनः शुरू करने की मांग उठाई गई है। इस संबंध में ‘आवर राइट्स आर्गेनाईजेशन’ की ओर से 29 सितंबर 2026 को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के माननीय उपराज्यपाल को एक लिखित प्रतिनिधित्व सौंपा गया है।

संगठन के अध्यक्ष सी. सरवनन द्वारा सौंपे गए प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लोगों की ओर से संगठन उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा को पदभार संभालने पर शुभकामनाएं देता है और उम्मीद करता है कि उनके नेतृत्व में प्रशासन लोगों के लिए सुलभ, पारदर्शी और उत्तरदायी शासन सुनिश्चित करेगा। प्रतिनिधित्व में कहा गया कि इसी भावना के तहत राज निवास (लोक निवास) में नियमित जन शिकायत सुनवाई बहाल करने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

संगठन ने कहा कि जन सुनवाई नागरिकों के लिए अपनी शिकायतों और समस्याओं को सीधे प्रशासन के समक्ष रखने का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती है। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों और सार्वजनिक सेवाओं से संबंधित समस्याओं को सीधे संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जा सकता है तथा प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।

प्रतिनिधित्व में विशेष रूप से कहा गया कि आम नागरिकों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, वरिष्ठ नागरिकों, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, विभिन्न कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने में असमर्थ व्यक्तियों तथा अलग-अलग विभागों के माध्यम से अपनी शिकायतें आगे बढ़ाने में कठिनाई महसूस करने वाले लोगों के लिए नियमित जन सुनवाई एक व्यावहारिक और सुलभ माध्यम साबित हो सकती है।

संगठन ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक परिस्थितियों और विभिन्न द्वीपों में फैली आबादी का भी उल्लेख किया। प्रतिनिधित्व में कहा गया कि दूर-दराज के क्षेत्रों से प्रशासनिक कार्यालयों तक पहुंचना कई नागरिकों के लिए काफी कठिन हो सकता है। ऐसे में एक संरचित और नियमित जन सुनवाई नागरिकों की वास्तविक समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्रतिनिधित्व में स्पष्ट किया गया कि नियमित जन सुनवाई प्रशासन की मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था या विभागीय तथा वैधानिक प्रक्रियाओं का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उसके अतिरिक्त एक नागरिक-केंद्रित व्यवस्था के रूप में काम कर सकती है। इसके माध्यम से अनसुलझी, लंबित, विलंबित अथवा बार-बार सामने आने वाली शिकायतों की पहचान कर उन्हें उचित प्राधिकारी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

संगठन के अनुसार, ऐसी सुनवाई के माध्यम से बार-बार उठने वाली समान शिकायतों की पहचान भी की जा सकती है और प्रशासन संबंधित नीतिगत या विभागीय स्तर पर आवश्यक सुधारों पर विचार कर सकता है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, लंबित शिकायतों की पहचान करने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और लोगों का प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

प्रतिनिधित्व में उपराज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि राज निवास (लोक निवास) में नियमित जन शिकायत सुनवाई को पुनः शुरू करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन ने सुझाव दिया कि यह सुनवाई नियमित आधार पर, अधिमानतः प्रत्येक माह या प्रशासन की सुविधा के अनुसार आयोजित की जा सकती है।

संगठन ने जन सुनवाई को प्रभावी बनाने के लिए नागरिकों की शिकायतों के पंजीकरण की सरल व्यवस्था, सुनवाई से पहले लिखित शिकायत और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की सुविधा तथा संबंधित विभाग या प्राधिकारी को शिकायत भेजने के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित करने जैसे उपायों पर विचार करने का अनुरोध किया है।

इसके साथ ही शिकायतों की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए एक उपयुक्त शिकायत रजिस्टर अथवा डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया है कि कोई भी वास्तविक शिकायत अनदेखी न रह जाए। संगठन ने शिकायतों की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रतिनिधित्व में कहा गया कि जन सुनवाई केवल शिकायतें सुनने का माध्यम न होकर यह सुनिश्चित करने का प्रभावी तंत्र होना चाहिए कि वास्तविक शिकायतों की जांच की जाए, उन्हें संबंधित सक्षम प्राधिकारी तक पहुंचाया जाए और लागू नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप उनका समाधान किया जाए।

संगठन ने कहा कि राज निवास (लोक निवास) में नियमित जन सुनवाई प्रशासन और आम जनता के बीच सीधे संवाद का माध्यम बन सकती है। उसके अनुसार, नागरिकों के साथ नियमित संवाद से जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता, प्रशासनिक देरी और विभिन्न द्वीपों में सामने आने वाली कठिनाइयों की बेहतर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

प्रतिनिधित्व में उपराज्यपाल से इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए राज निवास (लोक निवास) में नियमित जन सुनवाई बहाल करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि उपराज्यपाल के नेतृत्व में प्रशासन पारदर्शिता, जवाबदेही, सुलभता और जन भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा।

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