सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम – 26 सितंबर
भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ने 26 सितंबर को रांची एसोसिएशन सभागार में राज्य स्तरीय श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन में चाथम आरा मिल, डाक सेवा विभाग, लोक निर्माण विभाग, नगर निकाय तथा विभिन्न अन्य सरकारी विभागों के सैकड़ों श्रमिकों ने भाग लिया।
सम्मेलन का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित करने के साथ हुआ, जिसके बाद विशिष्ट अतिथियों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ श्रमिक नेता हमीद अली ने की, जबकि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के.पी. उस्मान के नेतृत्व में सम्मेलन आयोजित किया गया।
भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन में शामिल हुए। भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. राजेश गढ़िया तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष टीएसजी भास्कर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रमिकों के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों तथा मजबूत श्रमिक संघ प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर विचार रखे।
सम्मेलन में विशेष अतिथियों के रूप में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष जुबैदा बेगम, अंडमान प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता तमिलसेल्वन तथा क्षेत्रीय सरकारी पेंशनभोगी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ के महासचिव सेंथिल भी उपस्थित रहे।
सम्मेलन को भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ओ. बशीर, महासचिव मोहम्मद रफी, उपाध्यक्ष आनंद राव, उपाध्यक्ष एम. बिंदु तथा महासचिव पी. कन्नन ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर डाक सेवा विभाग गोदी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इब्राहिम कोलकाट्टिल, चाथम मिल के मिल प्रभाग कार्य समिति के सचिव सिद्दप्पा रेड्डी, वन श्रमिक संघ के उपाध्यक्ष बालकृष्ण तथा विभिन्न विभागों के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।
सम्मेलन का एक प्रमुख विषय अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में कांग्रेस के श्रमिक संघ आंदोलन को पुनर्जीवित और मजबूत करना रहा। नेतृत्व ने उन विभागीय श्रमिक संघों को फिर से संबद्ध करने के प्रयास करने का आह्वान किया, जो ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस के श्रमिक संघ से जुड़े रहे हैं।
सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि पूरे द्वीपसमूह में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज किया जाएगा, भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस का विस्तार किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि श्रमिकों की समस्याओं और चिंताओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाए।