फोटो में अफ्रीकी स्वाइन फीवर से प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता।  
देश/विदेश

अफ्रीकी स्वाइन फीवर से प्रभावित पशुपालकों को मुआवजा देने की मांग

कांग्रेस ने प्रभावित परिवारों और सफाईकर्मियों की सुरक्षा उठाई

SANJIB KUMAR ROY

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --

अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के प्रसार से सूअर पालन पर निर्भर परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका के बीच कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि द्वीपसमूह के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में सूअर पालन लोगों की आय का प्रमुख साधन है। इस व्यवसाय से कई परिवारों के साथ-साथ बेरोजगार युवा भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में बीमारी के कारण सूअरों की मृत्यु होने अथवा संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने से प्रभावित होने वाले परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना आवश्यक है।

प्रेस वार्ता में अंडमान एवं निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रंगलाल हलदार और दक्षिण अंडमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष जॉन रॉबर्ट सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बीमारी के कारण कई पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और प्रभावित परिवार लगातार सहायता की मांग कर रहे हैं। नेताओं ने प्रशासन से आग्रह किया कि बीमारी से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाए, लेकिन किसी भी कदम के दौरान पशुपालकों की आजीविका और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि द्वीपसमूह के ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों में अनेक परिवार लंबे समय से सूअर पालन के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते आ रहे हैं। कई लोगों के पास आय का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है। यदि उनके पशुओं की मृत्यु हो जाती है, तो उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। नेताओं के अनुसार, एक सूअर की कीमत लगभग 5,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये अथवा कुछ मामलों में एक लाख रुपये तक हो सकती है। ऐसे में पशुओं के नुकसान से परिवारों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है।

नेताओं ने यह भी कहा कि बीमारी से प्रभावित किसी क्षेत्र में आवश्यक कार्रवाई करते समय वहां के पशुपालकों की परिस्थितियों का आकलन किया जाना चाहिए, जिससे आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

दक्षिण अंडमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष जॉन रॉबर्ट ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले दक्षिण अंडमान की उपायुक्त से मुलाकात कर प्रभावित पशुपालकों की समस्याओं को उठाया था। उन्होंने इस संबंध में ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जिन लोगों के सूअरों की मृत्यु बीमारी के कारण हुई है, उन्हें उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। उनके अनुसार, उपायुक्त ने इस मामले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि संबंधित निकाय की ओर से प्रभावित लोगों की सूची उपलब्ध कराए जाने के बाद मामले पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रभावित पशुपालकों की वास्तविक संख्या और नुकसान का सही आकलन करने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों की पहचान करने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं की जाए। बीमारी के कारण पहले ही आर्थिक नुकसान झेल रहे परिवारों को समय पर राहत मिलनी चाहिए, ताकि उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट उत्पन्न न हो।

प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सूअरों को पकड़ने और संक्रमण की रोकथाम से जुड़े कार्यों में लगे नगरपालिका के सफाईकर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों के अतिरिक्त कार्यभार का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी बीमारी को फैलने से रोकने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इसलिए प्रशासन को उनके अतिरिक्त कार्य के लिए उचित आर्थिक प्रोत्साहन देने पर विचार करना चाहिए। साथ ही, काम के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सावधानियां और सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बीमारी से निपटने के लिए प्रशासन को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, पशुओं की स्थिति का आकलन, संक्रमण नियंत्रण और आर्थिक नुकसान झेलने वाले परिवारों को राहत देने के लिए समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने दोहराया कि सूअर पालन अनेक परिवारों की आजीविका का आधार है और बीमारी के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।

SCROLL FOR NEXT